भारतीय मूल के अमरीकी ट्रंप से खुश क्यों हैं?

    • Author, सलीम रिज़वी
    • पदनाम, न्यूयॉर्क से बीबीसी हिंदी के लिए

अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं.

अमरीका में अधिकतर भारतीय मूल के लोग तो डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक रहे हैं.

लेकिन 2016 के चुनाव में भारतीय मूल समेत दक्षिण एशियाई मूल के बहुत से अमरीकी लोग ऐसे भी हैं जो पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में थे, लेकिन इस बार उन्होंने ट्रंप को वोट दिया.

दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने वोट तो हिलेरी क्लिंटन को दिया, लेकिन अब उन्हें ट्रंप से उम्मीद है.

ज़्यादातर भारतीय मूल के अमरीकी लोग इस बात से ख़ुश हैं कि निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल की निकी हेली को संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का राजदूत नियुक्त किया है.

अब भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के अमरीकियों को डोनल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद क्या उम्मीदें हैं?

न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय मूल के वकील आनंद आहूजा 1990 में भारत से अमरीका आकर बस गए थे.

उन्होंने डोनल्ड ट्रंप को चुनावी मुहिम के शुरुआती दौर में ही समर्थन देना शुरू कर दिया था.

आनंद आहूजा कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि डोनल्ड ट्रंप चुनाव में किए गए वादों को पूरा करेंगे. चाहे वह दीवार बनाने की बात हो, राजनीतिक भ्रष्टाचार ख़त्म करने की बात हो या इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथियों का ख़ात्मा हो, वह अपने वायदे पूरे करेंगे."

आनंद आहूजा को इस बात पर भी फ़ख्र है कि ट्रंप ने एक भारतीय मूल की महिला को संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत के लिए चुना है.

आनंद आहूजा कहते हैं, "प्राइमरी चुनाव के दौरान निकी हेली उनकी आलोचना करती रहीं, लेकिन फिर भी डोनल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल की और काली महिला को संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत के लिए चुना."

आहूजा का मानना है कि ट्रंप की प्रवासी नीति से भी भारत से आने वाले लोगों को फ़ायदा होगा. उन्होंने कहा कि ट्रंप के दौर में भारत-अमरीकी रिश्ते अधिक मज़बूत होंगे.

आनंद आहूजा ने कहा, "डोनल्ड ट्रंप तो भारत के साथ रिश्तों को मज़बूत करने के लिए माकूल अमरीकी राष्ट्रपति साबित होंगे. उन्होंने भारत और मोदी की हमेशा तारीफ़ की है."

वहीं फ़िलाडेल्फ़िया में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अहसन रहीम फ़ाइनेंस प्रोफ़ेशनल हैं और मशहूर व्हार्टन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में एमबीए कर रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप ने भी व्हार्टन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट से 1960 के दशक में डिग्री हासिल की थी.

हिलेरी क्लिंटन के समर्थक अहसन रहीम को डोनल्ड ट्रंप से उम्मीदें कम हैं.

अहसन रहीम ने कहा, "यह तो देखने वाली बात होगी कि ट्रंप करते क्या हैं. उनको तो ख़ुद नहीं पता कि नीतियां कैसे लागू होंगी. वह तो अपने सलाहकारों पर निर्भर रहेंगे. ट्रंप को अपने बिज़नेस में भी उतनी कामयाबी नहीं मिली थी. उनके कई बिज़नेस घाटे में रहे हैं. उनकी अधिकतर कामयाबी तो किस्मत से मिली है न कि अच्छे बिज़नेस फ़ैसलों के कारण. वैसे भी देश चलाना और बिज़नेस चलाना बहुत मुख़तलिफ़ बातें हैं."

रतन शर्मा न्यूयॉर्क के जैक्शन हाइट्स इलाके में इंडिया सारी पैलेस नाम की स्टोर में मैनेजर हैं.

उन्होंने अमरीकी चुनाव में वोट तो डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को दिया था, लेकिन उन्हें ट्रंप से उम्मीदें हैं.

रतन शर्मा ने कहा, "ट्रंप एक बिज़नेसमैन हैं तो हमें उम्मीद है कि वह अर्थव्यवस्था के लिए कुछ बेहतर कर सकते हैं. वह नौकरियां अधिक बढ़ाने की बात कर रहे, चीन से सामान कम लाने की बात कर रहे, तो यह तो अच्छा होगा.''

शर्मा ने कहा, ''स्वास्थ्य कानून में बदलाव भी ठीक होगा. हां, विदेश नीति में उनका अनुभव नहीं है तो उनके सलाहकार मदद कर सकते हैं."

भारतीय मूल के अमरीकी कारोबारी बंसीभाई शाह 1970 के दशक में गुजरात के बड़ौदा से अमरीका आए थे. उन्होंने बड़ौदा से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर कुछ साल मुंबई में नौकरी की, फिर अमरीका आए और जल्द ही अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी खोल ली.

अब बंसीभाई एक आईटी कंपनी के भी मालिक हैं. बंसीभाई शाह को डोनल्ड ट्रंप पर पूरा यक़ीन है.

बंसीभाई शाह कहते हैं कि डोनल्ड ट्रंप एक विश्व स्तर के कामयाब कारोबारी हैं और वह उसी अनुभव और कला का प्रयोग करके 'अमरीका को फिर से महान बनाएंगे'.

बंसीभाई शाह कहते हैं, "ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से अमरीका का भविष्य बहुत ही अच्छा होने वाला है. उन्होंने कारोबारी की हैसियत से एक छोटे से कारोबार को विश्व स्तर पर नंबर वन कर दिया. उसी तरह ट्रंप अमरीका को भी नंबर वन कर देंगे. अब अमरीका फिर से ग्रेट होने वाला है."

डोनल्ड ट्रंप 20 जनवरी को भारतीय समयानुसार रात साढ़े दस बजे अमरीकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं.

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