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अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों पर ट्रंप का हमला
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
नव निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने देश की ही ख़ुफ़िया एजेंसियों को उस विवादास्पद दस्तावेज़ के लीक के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है जिसमें कहा गया है कि रूस के पास ट्रंप के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक जानकारी है.
अपनी जीत के बाद के पहले संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने उस दस्तावेज़ को बिल्कुल बेबुनियाद और झूठा करार दिया.
इन दस्तावेजों में कहा गया गया है कि रूसी अधिकारियों के पास ऐसी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं जिनमें ट्रंप को वेश्याओं के साथ देखा गया है. साथ ही उनके कारोबार के बारे में भी ऐसी जानकारी है जो उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है.
ट्रंप का कहना था, "ये शर्मनाक है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक ऐसी ख़बर को बाहर जाने दिया जो ग़लत है और झूठ है."
ग़ौरतलब है कि 25 पन्नों के इस दस्तावेज़ के बारे में वाशिंगटन में बहुत लोगों को जानकारी थी लेकिन इसकी पुष्टि नहीं होने के कारण इसे सामने नहीं लाया गया था.
जब अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इनकी बुनियाद पर दो पन्नों की एक रिपोर्ट राष्ट्रपति ओबामा और डॉनल्ड ट्रंप के सामने पेश की तो माना गया कि एजेंसियां इस जानकारी को गंभीरता से ले रही हैं और मंगलवार की शाम से इसकी रिपोर्टिंग शुरू हो गई.
रूस ने भी इन ख़बरों का ज़ोरदार खंडन किया है और कहा है कि ये द्विपक्षीय रिश्तों को ख़राब करने की साज़िश है. ट्रंप अपने चुनावी अभियान के दिनों से ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन की तारीफ़ करते रहे हैं और रूस के साथ बेहतर रिश्तों की बात करते रहे हैं.
प्रेस कांफ़्रेंस में पहली बार उन्होंने ये स्वीकार किया कि डेमोक्रैटिक नेशनल कमिटी की हैकिंग में संभवत: रूस का हाथ था लेकिन साथ ही ये भी कहा कि चीन या किसी और का भी हाथ हो सकता है.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां इसके पीछे रूस का हाथ मानती हैं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही राष्ट्रपति ओबामा ने पिछले दिनों कई रूसी राजनयिकों को अमरीका छोड़ने का आदेश दिया था.
ट्रंप ने मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने के वादे को भी दोहराया और कहा कि किसी न किसी रूप में इसपर आने वाला खर्च भी मेक्सिको को ही उठाना होगा.
उन्होंने अपना सारा कारोबार अपने दोनो बेटों के हवाले करने का भी एलान किया और कहा कि राष्ट्रपति पद पर रहते हुए वो अपने बिज़नेस से किसी तरह का संबंध नहीं रखेंगे.
प्रेस कांफ़्रेस से ट्रंप का असली मकसद ये एलान करना था कि वो अपने बिज़नेस और राष्ट्रपति पद के बीच किसी तरह का संबंध नहीं रखेंगे और साथ ही आने वाले दिनों की अपनी योजना से जनता को अवगत कराना चाहते थे लेकिन प्रेस कांफ़्रेंस में रूस से ज़ुड़े आरोप ही हावी रहे.
ये दस्तावेज़ ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-6 के एक पूर्व एजेंट ने एक निजी संस्था के लिए जुटाए थे और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ सदस्यों को भी इसकी जानकारी थी. वरिष्ठ सेनेटर जॉन मैकेन ने इस दस्तावेज़ को अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई के हवाले कर दिया था.
देखा जाए तो चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने विकीलीक्स की तरफ़ से जारी हिलेरी क्लिंटन की टीम के हैक किए हुए ईमेल्स का ख़ासा फ़ायदा उठाया था.
विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने फ़ेक न्यूज़ या फ़र्ज़ी ख़बरों का भी अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया था लेकिन इस बार अगर ये दस्तावेज़ ग़लत साबित होते हैं तो वो ख़ुद उसकी चपेट में आए हैं और उसका गुस्सा उनकी ट्विट्स में साफ़ नज़र आ रहा है.
कई लोगों का ये भी मानना है जिस तरह से उन्होंने अपनी ही ख़ुफ़िया एजेंसियों पर सार्वजनिक रूप से हमला किया है, वो अमरीका के लिए काफ़ी खतरनाक साबित हो सकता है.
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