पेरू: 10 साल में कैसे गरीबी आधे से कम

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लातिन अमरीकी देश पेरू आर्थिक तरक्की की नज़ीर पेश कर रहा है.
पिछले एक दशक में पेरू ने अपनी गरीबी दर को पचास फीसदी से कम कर दिया है.
इस तरक्की ने वहां की पचास से 22 फीसदी जनसंख्या के जीवन को प्रभावित किया है.
पेरू में पिछले पांच वर्षों में सत्तर लाख लोगों की गरीबी कम या खत्म हुई है.
यह दावा तो नहीं किया जा सकता कि वहां गरीबी पूरी तरह से खत्म हो गई है लेकिन इतना तो माना जा सकता है कि वहां लाखों लोगों की जिंदगी पहले से बेहतर जरूर हुई है.
पेरू के शहरों में इस असर को साफ देखा जा सकता है.

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लीमा के एक ज़िले के विला अल सालवाडोर के एक गांव में रहने वाले टोनी पॉलोमीनो के अनुसार,' पहले इसकी गिनती अभागे गांवों में होती थी लेकिन आज यहां पर वह सब सुविधाएं मौजूद हैं जिनका ख्वाब कभी हम देखा करते थे.'
टोनी के मुताबिक उन्होंने अपने भाई—बहनों को गरीबी के कारण मरते देखा है.
टोनी बताते है कि,'पहले यहां जीवन काफी कठिन था.यहां पानी और बिजली नहीं थे. लोगों को भोजन हासिल करने के लिए मीलों पैदल जाना पड़ता था.'
बीबीसी से बातचीत में पेरू के राष्ट्रपति पेडरो पैबलो क्यूचिंस्की कहा कि,' कई लिहाज से देखा जाए तो आज हम पेरू को पहचान नहीं पाएंगे. आज दस वर्ष पहले ट्रक चला रहे कई लोगों का नाम आज पेरू के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार होता है. आज पेरू का व्यापारी वर्ग अपने अतीत से पूरी तरह से अलग है और यह अच्छे बदलाव का संकेत है.'
कैसे शुरु हुई बदलाव की कहानी
इस बदलाव की कहानी 1990 के दशक से शुरू होती है.
इसी दशक में इस देश में विश्व बैंक के ढांचागत बदलाव कार्यक्रम के तहत अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया गया.
नए बाज़ारों के लिए अपने दरवाजे खोलने के चलते पेरू को अपने खनिजों की रिकॉर्ड निर्यात कीमतें मिली.
चीन ने इन खनिजों की खरीद में अहम भूमिका निभाई.
बाज़ारों के खुले दरवाजों ने विदेशी निवेश को भी आकर्षित किया.
इसके चलते वहां पर सार्वजनिक कर्ज़ और मंहगाई की दर कम हुई और घरेलू बचत बढ़ी.
पेरू को आज लातिन अमरीकी देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक में गिना जाता है.
आज पेरू में पैसा बरस रहा है. पेरू में 1990 में निर्यात तीन हजार मिलियन डॉलर था जो 2010 में बढ़कर 36 हज़ार मिलियन डॉलर हो गया.

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लेकिन सिर्फ सरकारी नीतियों की बदौलत पेरू ने यह मुकाम हासिल नहीं किया है.
जनता की भागीदारी
इसमें जनता की भी सक्रिय और अहम भागीदारी रही है.
अल्बर्टो फुजीमोरी के सरकार के समय पेरू की अर्थव्यवस्था स्थिर हुई और इसका विकास हुआ.
फुजीमोरी फिलहाल 'इंसानियत के खिलाफ़ किए अपराधों ' के लिए सजा काट रहे हैं.
सरकारी नीतियों के कारण बजट और नौकरियों में कटौती को बढ़ावा मिला. इसके प्रतिरोध में पेरू की जनता सड़कों पर उतर गई.
टोनी के अनुसार,''हमें शुरू से पता था कि कोई बाहरी मदद हमें मिलने वाली नहीं हैं. पानी,बिजली... इन सबके लिए हमें मालूम था कि लड़ना होगा. हमारे यहां यह कहावत चल गई थी कि 'क्योंकि हमारे पास कुछ नहीं ,सो हमें हर चीज़ करनी पड़ेगी.' सो हमने स्कूल से लेकर खेलने के मैदान तक खुद बनाए. और यह सब तब हुआ जब हमने इन सुविधाओं को लेकर सरकारी दफ्तरों के सामने बड़े प्रदर्शन आयोजित किए.सरकार हमारे पास कुछ देने के लिए नहीं आई ,यह जनता की मांग का दबाव था. इस दबाव को डालकर ही हमने अपने लिए यह सब हासिल किया है.''
जनता के गुस्से में थी और उसने सही वक्त पर इसे दिखाया. सरकार को जनता के समर्थन की जरूरत थी सो उसने जनता की मांग को पूरा किया.












