इस बार पुतिन को गुस्सा क्यों नहीं आया?

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- Author, मार्क लोवेन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अंकारा (तुर्की)
तुर्की में रूसी राजदूत आंद्रे कार्लोफ़ की हत्या के बाद राष्ट्रपति पुतिन को गुस्सा क्यों नहीं आया? आख़िर इस हाई-प्रोफाइल हत्या के बाद भी दोनों देशों के संबंधों में कोई कड़वाहट क्यों नहीं आई?

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अंकारा में हत्या के बाद चार रूसी महिलाएं तुर्की में दूतावास के बाहर कार्लोफ़ को श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं. ये महिलाएं कार्लोफ को जानती थीं. ये किसी तरह खुद को भावुक होने से रोकने की कोशिश करती दिखीं.
रूसी कल्चरल असोसिएशन में काम करने वाली लैरिसा लुत्कोव तुर्कन ने कहा, ''यह हम सभी रूसियों के लिए बड़ी त्रासदी है. वह बहुत अच्छे इंसान के साथ तेज-तर्रार डिप्लोमेट थे.''

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मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्हें इस मामले में रूसी सरकार के गुस्से का अंदाजा है. लेकिन वह इस सवाल पर रुक गईं. उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि मैं इसे समझती हूं लेकिन अभी इस पर बात करना कठिन है.''
इस हत्या से रूस और तुर्की दोनों विचलित हैं. कार्लोफ़ को उनके सहकर्मी पेशेवर और कम बोलने वाले डिप्लोमेट के रूप में जानते थे.
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इस हत्या के बाद अभी तक दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में कोई तनातनी नहीं आई है.
यहां तक कि तुर्की के राष्ट्रपति एर्दवान और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन एक ही भाषा में बोल रहे हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच संबंधों को तबाह करने की कोशिश है लेकिन लोग इसमें कामयाब नहीं होंगे. कहा जा रहा है कि इस हत्या के बाद दोनों देश आतंक के ख़िलाफ़ और करीब आ सकते हैं.

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नाकाम पड़ोसी
रूस और तुर्की के बीच युद्ध का इतिहास चार शताब्दी पुराना है. इनके बीच आख़िरी सैन्य संघर्ष से लेकर 100 सालों तक कलह की स्थिति बनी रही. सीरिया के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच पर्याप्त मतभेद हैं.
तुर्की, सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है जबकि रूस असद का साथ दे रहा है.
रूस असद के समर्थन में सीरिया में सैन्य मदद कर रहा है. एक साल पहले जब तुर्की ने सीरिया की सीमा पर रूसी एयरक्राफ्ट को मार गिराया था तब दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर पहुंच गया था.
पुतिन ने कहा था कि आतंक के एक साथी ने पीठ में छुरा भोंका है. मॉस्को ने कहा था कि एर्दवान के परिवार को इस्लामिक स्टेट के कथित तेल तस्करी से लाभ पहुंचता है.

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रूसी एयरक्राफ्ट गिराने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की एक प्रबल आशंका बनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दोनों देशों के बीच महीनों तनाव रहने के बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने पुतिन से माफी मांगते हुए एक पत्र लिखा था. अब दोनों देशों के बीच गर्मजोशी की वजह सीरिया ही है.
सीरिया में जारी संघर्ष में पश्चिम के देशों का प्रभाव लगातार कम हो रहा है. पश्चिम के देश सीरिया से निकल रहे हैं और रूस, तुर्की की यहां मौजूदगी बढ़ रही है. सीरिया से दोनों देशों के हित जुड़े हैं.
तुर्की उत्तरी सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. दूसरी तरफ रूस एलेप्पो को असद के नियंत्रण में लाकर असद को मजबूत करना चाहता है. असद की मजबूती से ही रूस की सीरिया में मौजूदगी सुनिश्चित होगी.
हालांकि तुर्की के अधिकारी इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि सीरिया को लेकर दोनों देशों के बीच कोई समझौता है. दूसरी तरफ दुनिया भर में इसे संदिग्ध माना जा रहा है क्योंकि एलेप्पो में रूसी बमबारी पर तुर्की पूरी तरह से चुप है.
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