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27 साल बाद दफ़नाए गए फिलीपींस के तानाशाह मार्कोस
फिलीपींस के पूर्व तानाशाह फर्दिनांद मार्कोस को राजधानी मनीला में नायकों के कब्रिस्तान में दफ़नाया गया है.
मार्कोस को 1986 में अपदस्थ किया गया था और उन्हें निर्वासन पर मजबूर होना पड़ा था. 1989 में अमरीका में इनकी मौत हो गई थी. मौत के बाद से उनके गृह नगर बटेक में शव को संरक्षित कर रखा गया था.
मार्कोस के शव को दफ़नाने पर फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने शव को कब्रिस्तान में ले जाने की अनुमति दी.
दरअसल, मार्कोस को सम्मान देने को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था. मार्कोस को हज़ारों की हत्या, प्रताड़ना और अपहरण के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.
लोगों को यह बात रास नहीं आ रही थी कि जहां पूर्व राष्ट्रपतियों, कलाकारों और राष्ट्रीय महत्व के लोगों को दफ़नाया गया, वहां मार्कोस की अंत्येष्टि की जाए.
अगस्त महीने में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने अंत्येष्टि की अनुमति दी थी.
उन्होंने मार्कोस को फिलीपींस का सैनिक करार दिया था. कोर्ट ने भी नवंबर में इस मामले में मंजूरी दे दी थी. शुक्रवार को बिना किसी घोषणा के शव को कब्रिस्तान पहुंचाया गया. विपक्षियों के लिए यह घोषणा हैरान करने वाली थी.
इस मामले में सुरक्षा का इंतज़ाम कर रहे पुलिस प्रमुख ऑस्कर अलबयालदे ने निजी समारोह बताते हुए बेहद साधारण और पारिवारिक कार्यक्रम करार दिया है.
उन्होंने कहा कि यह कोई राजकीय अंत्येष्टि नहीं थी. हालांकि इस दिवंगत नेता को 21 बंदूकों की सलामी दी गई. एक्टिविस्ट बोनिफ़ासियो इलग़ान को मार्कोस के कार्यकाल में प्रताड़ित किया गया था. उन्होंने एसोसिएट प्रेस न्यूज एजेंसी से कहा कि मार्कोस की अंत्येष्टि रात में चोर की तरह की गई.
मार्कोस और उनकी पत्नी इमेल्द ने फिलीपींस में 20 सालों तक शासन किया था. इनके कार्यकाल में फिलीपींस के बड़े हिस्से में मार्शल लॉ लागू था. इनके ख़िलाफ़ लाखों की संख्या में जनता सड़क पर उतर गई थी और सत्ता से बेदखल कर दिया था.
फिलीपींस में इसे जनशक्ति क्रांति के रूप में जाना जाता है.
मार्कोस और उनकी पत्नी पर लोगों को प्रताड़ित करने के साथ व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का भी आरोप लगा था. इन पर स्टेट फंड से अरबों डॉलर चुराने का आरोप था. इन सबके बावजूद यह परिवार फिलपींस की राजनीति में लौटा.
परिवार वालों का कहना था कि मार्कोस का कार्यकाल देश की सुरक्षा, कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट और फ़रमान के लिहाज़ से काफ़ी अहम था. मार्कोस के बेटे फर्दिनांद 'बोंग बोंग' मार्कोस जूनियर मई के चुनाव में उप-राष्ट्रपति बनने के करीब पहुंच गए थे. उन्होंने बीबीसी से कहा कि चुनावी कैंपेन में पिता की पहचान से उन्हें मदद मिली थी.
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