वो फ़ैसले जिन्होंने बदल दी सऊदी महिलाओं की ज़िंदगी

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दशकों तक किए संघर्ष और इंकार के बाद सऊदी अरब में महिलाओं को बीते हफ़्ते कुछ अधिकार मिले.
सऊदी अरब में महिलाओं को कार चलाने का अधिकार मिला है. इस फ़ैसले की अरब मुल्कों समेत पूरी दुनिया में चर्चा है.
सोशल मीडिया में सऊदी अरब में हुए हालिया बदलावों पर बात हो रही है. आइए आपको बताते हैं बीते एक हफ़्ते में सऊदी अरब में महिलाओं ने कैसे इतिहास रचा...

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तारीख़ 23 सितंबर
सऊदी अरब के जिन स्टेडियम में अब तक पुरुष नज़र आते थे, वहां की कुर्सियों में पहली बार वहां आंखों में चमक लिए महिलाएं बैठी नज़र आईं.
मौका था सऊदी अरब के नेशनल डे का. ये महिलाएं नेशनल डे समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहली बार किंग फहद इंटरनेशनल स्टेडियम फोर रियाद में दाखिल हुईं थीं.
अब इस सऊदी में ये परंपरा थी कि उन स्टेडियमों में महिलाओं को जाने की इजाज़त नहीं होगी, जहां सऊदी लीग के मैच खेले जा रहे हों.
सऊदी सरकार ने इस पर कहा, समानता और राष्ट्रीय गर्व बढ़ाने के लिए की जा रही कोशिशों के तहत ये एक ज़रूरी क़दम है.

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तारीख़ 26 सितंबर
सऊदी महिला कार्यकर्ताओं के सालों से चलाए अभियान के बाद महिलाओं को लाइसेंस देने की इजाजत दी गई.
इस अभियान की शुरुआत 1990 के दौर में हुई थी. सालों की मनाही के बाद 26 सितंबर को सऊदी किंग सलामान बिन अब्दुल अजीज़ ने महिलाओं को गाड़ी चलाने के संदर्भ में आदेश दिया.
लेकिन महिलाओं को गाड़ियों की स्टेयरिंग हाथों में लेकर बाहर निकलने के लिए थोड़ा और इंतज़ार करना होगा.
किंग सलमान का दिया आदेश जून 2018 के बाद लागू होगा.

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तारीख़ 26 सितंबर, दूसरा कमाल
कैलेंडर में इस तारीख के आने से पहले सऊदी अरब के दूसरे देशों में उच्चायुक्त के पद पर सिर्फ पुरुष होते थे.
लेकिन 26 सितंबर को ये फैसला लिया गया कि फातिमा बाशेन को अमरीका में सऊदी अरब का उच्चायुक्त पद सौंपा जाएगा.
ये पहला मौका था, जब सऊदी अरब की किसी दूसरे मुल्क में नुमाइंदगी करने का मौका एक महिला का मिला था.
फातिमा ने ट्वीट कर कहा, ''मुझे फ़ख़्र है कि मैं संयुक्त राज्य अमरीका में सऊदी दूतावास में अपने मुल्क की सेवा करुंगी.''

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तारीख़ 28 सितंबर
सऊदी अरब में महिलाओं को फतवा जारी करने का हक़ हासिल नहीं था. लेकिन सऊदी महिलाओं के लिए सितंबर आज़ादी वाला महीना रहा.
अरब न्यूज़ समेत स्थानीय मीडिया ने खबर दी कि शूरा काउंसिल ने एक ऐसे प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिससे महिलाओं के पास भी फ़तवा जारी करने का अधिकार होगा.
इससे पहले बीते 45 सालों से ये अधिकार सिर्फ पुरुषों को हासिल था.
150 सदस्यों की शूरा काउंसिल में 107 वोट इस प्रस्ताव के पक्ष में मिले. महिला मुफ्तियों की नियुक्ति शाही हुक्म से होगी.

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तारीख़ 29 सितंबर
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उत्पीड़न विरोधी क़ानून भी सऊदी अरब में जल्दी लाया जाएगा. इस बाबत तैयारी शुरू कर दी गई है.
सऊदी के अख़बार ओकाज़ ने सूत्रों के हवाले से लिखा- सऊदी सुप्रीम ने मंत्रालयों को उत्पीड़न विरोधी सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दे दिया है. और इसे 60 दिनों में सामने लाने की कोशिशें हैं.''

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महिलाओं पर अब भी कुछ हैं पाबंदियां...
- सऊदी अरब में रहने वाली महिलाओं की ज़िंदगी अब भी पुरुषों के नियंत्रण में है.
- यात्रा, शादी, जेल से बाहर आने के लिए महिलाओं को पुरुषों की इजाज़त ज़रूरी है.
- ड्रेस कोड को अब भी मानना होगा.
- महिलाएं बिना इजाज़त परिवार के बाहर किसी पुरुष से बात नहीं कर सकतीं.
ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, महिलाओं को इलाज कराने या नौकरी करने से पहले भी किसी अभिभावक की इजाज़त लेनी होती है.
इससे पहले साल 2015 भी सऊदी महिलाओं के लिए ऐतिहासिक रहा था. इस साल देश की महिलाओं ने नगरपालिका चुनाव में पहली बार वोट डाला था.
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