चीन ने पूछा- जनरल बिपिन रावत का बयान भारत का है?

बिपिन रावत

इमेज स्रोत, Getty Images

भारत ने भले डोकलाम सीमा पर चीन से तनाव ख़त्म होने की घोषणा कर दी है लेकिन तल्खी ख़त्म होती नहीं दिख रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन से पांच सितंबर तक चीन में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे. उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाक़ात भी हुई थी. दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने की बात कही थी.

बुधवार को भारत के थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने डोकलाम सीमा पर 10 हफ़्ते तक भारत और चीन के बीच चले तनाव को लेकर कहा था कि भारत की उत्तरी सीमा पर इस तरह का तनाव बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है.

रावत ने यह भी कहा था कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान पश्चिमी मोर्चे पर फ़ायदा उठा सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बिपिन रावत ने ये बात नई दिल्ली में सेंटर फोर लैंड वॉर्फेर स्टडीज़ की तरफ़ से आयोजित एक सेमिनार में कही थी. बिपिन रावत के इस बयान पर अब चीन की भी प्रतिक्रिया आई है.

मोदी और शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, fmprc.gov.cn

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''भारत को इस पर बात करनी चाहिए कि दोनों देशों के बीच संबंध कैसे अच्छे हो सकते हैं. चीन और भारत दोनों एक दूसरे के लिए अहम पड़ोसी देश हैं. इसके साथ ही दोनों विकाशील देश हैं. दोनों उभरते हुए बाज़ार हैं. दोनों देशों को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए.''

भारत-चीन का भविष्य

शुआंग ने कहा, ''मैं नहीं कह सकता कि यह भारत का आधिकारिक बयान है या नहीं. क्या ऐसा उनका निजी तौर पर मानना है या भारत का यह आधिकारिक रुख है? ब्रिक्स सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात हुई थी.''

''जिनपिंग ने मोदी से कहा था कि चीन और भारत को ख़तरा से ज़्यादा विकास के मौक़ों को देखना चाहिए. उन्होंने पीएम मोदी से साफ़ कहा था कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और लाभपूर्ण सहयोग में ही दोनों देशों का भविष्य है.''

भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हो चुका है और इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ भी भारत के तीन युद्ध हो चुके हैं. भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं. रावत ने इस सेमिनार में यह भी कहा था कि विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता हमें युद्ध से नहीं बचा सकती है.

बिपिन रावत

इमेज स्रोत, Getty Images

रावत ने कहा, ''परमाणु हथियार प्रतिरोधक हथियार हैं. ये युद्ध से हमें दूर रख सकते हैं लेकिन हमारे संदर्भ में ये शायद सही नहीं हैं.'' डोकलाम सीमा पर चीन ने सड़क निर्माण कार्य शुरू किया था. इस पर भारत ने आपत्ति जताते हुए अपने सैनिकों को तैनात कर दिया था. दोनों देशों के बीच यहां 10 हफ़्तों तक तनाव जारी रहा था.

जनरल बिपिन रावत ने पीएम मोदी के चीन दौरे के बाद यह बयान दिया है, इसलिए इसे काफ़ी अहम माना जा रहा है. इससे पहले आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत ढाई मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है.

विश्लेषकों का कहना था कि ढाई मोर्चे पर युद्ध का मतलब चीन, पाकिस्तान और भारत में सक्रिय विद्रोही समूहों से था. हालांकि कई सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के लिए दो मोर्चों पर युद्ध लड़ना आसान नहीं होता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)