बाढ़ में बीमार हुए तो बनाया 'वाटर एंबुलेंस'

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, भागलपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार में भागलपुर ज़िले के वीरेंद्र मंडल के पिताजी की तबीयत अचानक ख़राब हो गई.
नवगछिया के इस्माइलपुर में रहने वाले वीरेंद्र के पिता ने पेट में दर्द और सांस फूलने की शिकायत की. घर से बाहर बाढ़ का पानी था.
रिंग बांध टूटने के कारण नवगछिया से सड़क संपर्क टूट चुका है. नवगछिया शहर भी बाढ़ की चपेट में है. ऐसे में वीरेंद्र की दिक़्क़त यह थी कि वे अपने बीमार पिता को अस्पताल कैसे ले जाएं.
बात घर से बाहर निकली तो गांव के सुरेश मंडल, भादो मंडल और मंगलेश यादव ने वीरेंद्र को धैर्य रखने को कहा. गांव के कुछ लड़कों ने ट्रक के दो ट्यूब में हवा भरी. हवा भरे ट्यूब को दो किनारे करने के बाद उसके ऊपर बांस की करची से बैठने लायक जगह बनाई गई. फिर उसके ऊपर चौकी लादकर बना लिया 'वाटर एंबुलेंस'.
वीरेंद्र मंडल के 65 वर्षीय पिता खोका मंडल उस पर चढ़ने से डर रहे थे. गांव के लोगों ने समझाया तो उस पर चढ़ने को तैयार हुए.

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10 मिनट तक जुगाड़ कर के बनाए गए एंबुलेंस के सहारे गंगा की लहरों पर चलने के बाद इस्माइलपुर के युवाओं ने उन्हें सूखी जगह तक पहुंचा दिया. वहां से टेंपो पर उन्हें भागलपुर सदर अस्पताल लाया गया. यहां उनका इलाज किया जा रहा है.
अब वे स्वस्थ हैं. बाढ़ का पानी घटने पर अपने गांव वापस लौट जाएंगे.
दरअसल केले के तने पर पटरियां डालकर घर के सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने वालों लोगों ने सोचा कि जब सामान बाहर जा सकता है तो फिर मरीज़ क्यों नहीं ले जाया जा सकता.
भादो मंडल ने बताया कि वाटर एंबुलेंस बनाना बहुत आसान है.

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इसे बनाना किसने सिखाया. वे बताते हैं कि गंगा किनारे घर है तो तैरना आता ही है. हमने अपने पूर्वजों को केले के तने की मदद से बाढ़ से सामान निकालते देखा है. ऐसे में लगा कि ट्यूब बड़ा हो तो उस पर चौकी या खटिया भी लादी जा सकती है. 5-6 लोग साथ में पानी में इसको लेकर चलते हैं. ताकि दुर्घटना की स्थिति में कोई अनहोनी नहीं हो.
इधर भागलपुर में गंगा के जलस्तर में काफ़ी कमी तो आई है पर यह अभी भी ख़तरे के निशान 31.09 मीटर से ऊपर बह रही है.
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