स्कॉर्पीन लीक से भारत को कितना नुकसान होगा?

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भारत सरकार ने नौसेना और फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस के बीच हुए स्कॉर्पीन पनडुब्बी समझौते की जानकारियां लीक होने की जांच के आदेश दिए हैं.

करार से जुड़े दस्तावेज़ के क़रीब 22 हज़ार पन्नों की जानकारी एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार के हाथ लगी है जिसने इस बारे में ख़बर प्रकाशित की है. इसमें पनडुब्बी की मारक क्षमता और कई तकनीकी खूबियों से जुड़ी बातें शामिल हैं.

साढ़े तीन अरब डॉलर के इस करार की बातें लीक होने पर चिंता ये जताई जा रही है कि इससे भारत की रक्षा तैयारी प्रभावित हो सकती है और युद्ध के समय दुश्मन इसका फ़ायदा उठा सकता है.

क्या वाक़ेई इस लीक से भारतीय नौसेना की तैयारी प्रभावित होगी? पूर्व नौसेना प्रमुख विष्णु भागवत ने बीबीसी से बातचीत में पूरा मामले पर अपनी राय रखी. भागवत का विश्लेषण, उन्हीं के शब्दों में-

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"स्कॉर्पीन पनडुब्बी से जुड़ी कई जानकारियों के सार्वजनिक होने से नुकसान तो हुआ है, लेकिन ऐसा नहीं समझना चाहिए कि इससे युद्ध के समय पनडुब्बी की क्षमता पर कोई असर होगा और वो पकड़ी जाएगी.

पनडुब्बी में जो तकनीकी ख़ूबियां हैं जैसे कि मिसाइल छोड़ने से संबंधित, अग्निशमन नियंत्रण से जुड़ी या एक मिसाइल छोड़ने के कितनी देर बाद दूसरी मिसाइल छोड़ी जा सकती है - इन जानकारियों के सार्वजनिक होने से युद्ध के समय में दुश्मनों को थोड़ा फ़ायदा हो सकता है.

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लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि जानकारी लीक होने से स्कॉर्पीन पनडुब्बी लड़ाई नहीं कर सकेगी या विजय हासिल नहीं कर सकेगी. अगर इसका ठीक तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा, सही जगह तैनात किया जाएगा, सही समय और रणनीतिक तरीके इस्तेमाल किया जाएगा तो इसको ज़रूर क़ामयाबी मिलेगी.

ये बातें नौसेना की खूबी और क्षमता पर ज्यादा निर्भर करती हैं. इसका पनडुब्बी से उतना संबंध नहीं है.

स्कॉर्पीन से जुड़ी और भी जानकारियां अगर लीक हो जाएं तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.

फिलहाल भारत छह पनडुब्बी बना रहा है. कुछ लोगों का इरादा था कि तीन और पनडुब्बी बनाई जानी चाहिए. चूंकि इसकी खूबियों से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आ गई हैं तो अब भारत को तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बी नहीं बनानी चाहिए.

अब सवाल ये है कि जब भी भारत विदेश से कुछ ख़रीदता है तो ये समस्या तो रहती ही है. हम चाहे हवाई जहाज़ ख़रीदें, पनडुब्बी, टैंक, फ़ायर कंट्रोल सिस्टम या रेडार ख़रीदें - ये सब कमर्शियल उत्पाद हैं. कंपनियों ने उन्हें विश्व बाज़ार में बेचने के लिए विकसित किया है. तो फिर बाज़ार में कौन सी जानकारी गुप्त रह सकती है?

जब तक हम भारत में खुद स्वदेशी तकनीक से पनडुब्बी नहीं बनाते तब तक जानकारियों के लीक होने या सार्वजनिक होने का ख़तरा मौजूद रहेगा."

(बीबीसी के विनीत ख़रे की पूर्व नौसेना प्रमुख विष्णु भागवत से बातचीत पर आधारित)

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