'कश्मीर का जवाब राजनीतिक हल'

कश्मीर विरोध

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    • Author, प्रो. राधा कुमार
    • पदनाम, लेखिका और कश्मीर मसले पर वार्ताकार

कश्मीर पर 12 अगस्त को सर्वदलीय बैठक हो रही है. इससे क्या उम्मीदें रखी जाएं, पढ़िए मशहूर लेखिका और कश्मीर पर वार्ताकार रही प्रोफ़ेसर राधा कुमार की राय.

कश्मीर मुद्दे को लेकर दो बार संसद में बहस हुई है. दोनों बार आत्मचिंतन हुई कि क्या ग़लतियां हुई हैं, क्या चीज़े बदलनी हैं और माहौल को कैसे बनाना है.

मैं उम्मीद करूंगी कि बैठक में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव स्वीकार होगा और सरकार इस दल को कश्मीर भेजने की तैयारियां करेंगी.

इस दल को तो शायद एक महीना पहले ही जाना चाहिए था.

लेकिन अभी भी जाएं तो कुछ उम्मीद हम कर सकते हैं कि माहौल थोड़ा बेहतर होगा. पर फर्क़ थोड़ा सा ही आएगा.

पहली सबसे बड़ी ग़लती यह थी कि 2010 में हुए हादसे के बाद जब एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल और एक वार्ताकारों की टीम गई और सेना की तरफ से भी सुधार होने के बाद एक माहौल बना तब उस वक़्त अगर राजनीतिक समाधान की बात शुरू होती तो शायद हम इस स्तर पर इस वक़्त नहीं पहुंचते.

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अब ज्यादातर लोग यही कह रहे हैं कि इस बार तो आपको दम लगा कर राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा शुरू करनी ही पड़ेगी.

मुझे लगता है वो इतनी जल्दी तो नहीं होगा पर अगर संसदीय प्रतिनिधिमंडल जाए, लोगों को वहां कुछ विश्वास मिले कि फौरन ही राजनीतिक मुद्दे पर बात शुरू हो जाएगी और उसमें हर विचार के लोग हिस्सा ले पाएं तो मुझे लगता है कि हम कुछ उम्मीद कर पाएंगे.

ये बात सही है कि इतने सालों से नहीं किया तो अब राजनीतिक इच्छा शक्ति बनानी पड़ेगी.

पर ये अच्छी बात है कि विपक्षी पार्टियां राजनीतिक इच्छा शक्ति बनाने में शामिल होने को तैयार हैं.

जब पहले भाजपा विपक्ष में थी वो तैयार नहीं थी पर ये लोग शायद तैयार हैं. तो सरकार को इनकी मदद और सहमति भी मिल सकती है.

इस बार पूरी गंभीरता से राजनीतिक मुद्दे पर हल निकालने का प्रयास किया जाए और वो जल्द से जल्द किया जाए.

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शुरुआत में तो सब लोग अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर करना चाहेंगे.

पर जब हम लोगों ने पहली बार शुरुआत की थी तो उस वक़्त भी शुरू में लोगों ने हम पर काफी ग़ुस्सा निकाला.

लेकिन तीन-चार महीने बाद माहौल धीरे-धीरे बदला. यही इन लोगों को देखना पड़ेगा.

एक बार से कुछ नहीं होगा इस दिशा में लगातार काम जारी रखना पड़ेगा.

इसलिए मैं कहती हूं कि इस बार राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा करेंगे तभी माहौल बदलेगा.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से बातचीत पर आधारित)

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