'जबसे आप कश्मीर में आए, वहां आग लग गई'

राज्य सभा में कश्मीर मुद्दे पर बुधवार को हुई चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के सामने कई सवाल उठाए.
विपक्षी दलों के नेताओं ने कश्मीर की ताज़ा ज़मीनी स्थिति की बात की और सरकार से अब तक की गई कार्रवाई को लेकर तीखे सवाल पूछे.
चर्चा में सरकार की ओर से राजनाथ सिंह ने जवाब दिया और कहा कि कश्मीर में 'पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा'.
पेश है इसी बहस के कुछ चुनिंदा अंश.

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सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि "गिद्ध भी तभी मंडराते हैं जब कंकाल पर ख़ून के छींटे उसे दिखते हैं. हमारी ज़मीन पर ख़ून के छींटे पड़े हुए हैं. ख़ून बिखरा पड़ा है. हमें सोचना होगा कि क्यों हम पाकिस्तानी और सीमा पार से आने वाले चरमपंथी गिद्धों को हमारी ज़मीन पर मंडराने दे रहे हैं. कश्मीर में सांप्रदायिक तनाव नहीं है. कश्मीरियत का मसला स्वतंत्रता से जुड़ा है."
येचुरी ने ये भी कहा, "हमें पैलेट गन का इस्तेमाल बंद करना चाहिए. कश्मीर के लोगों के साथ यह अविश्वास का माहौल क्यों है? यदि विश्वास में कमी है, तो सरकार को विश्वास का माहौल बनाना चाहिए. आज हमारे सामने सवाल ये है कि कश्मीर घाटी में हालात क़ाबू में क्यों नहीं आ रहे है."

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कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "इससे पहले भी सदन में कश्मीर के हालात को लेकर चर्चा हुई, लेकिन प्रधानमंत्री ने कभी भी सदन में इस पर बयान नहीं दिया, बल्कि वे मध्यप्रदेश से कश्मीर के हालातों पर बोले. मुझे याद है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी मुद्दे पर एक महीने के सत्र में चौथी बार चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री जो कि ख़ुद सत्र के दौरान सुबह दस या साढ़े दस बजे आकर संसद में अपने कमरे में बैठते हैं. लेकिन वे दोनों सदनों से इतने नज़दीक होकर भी उनसे सबसे ज़्यादा दूर हैं. उनके कमरे से लोकसभा और राज्यसभा में आने में चंद सेंकेड लगते हैं, लेकिन उनके न आने के चलते यह दूरी कई हज़ार किलोमीटर बन गई है. मैं कहना नहीं चाहता लेकिन, जबसे आप कश्मीर में आए हैं, वहां आग लग गई."
आज़ाद ने कहा, "मैं अटल बिहारी वाजपेयी जी की बहुत क़द्र करता हूं. कश्मीर की आज़ादी और जम्हूरियत की बात उन्हीं के मुंह से अच्छी लगती थी, औरों के नहीं."

जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव ने कहा, "हमने फ़ैसला किया था कि बड़े पैमाने पर कश्मीर के नौजवानों को देश भर में पढ़ाई के अवसर दिए जाएंगे, लेकिन आज कितने नौजवान पढ़ाई करने के लिए रह गए और कितने वापस चले गए? हम कश्मीर के लोगों के साथ बराबरी का सलूक कर ही उन्हें साथ खड़ा कर सकते हैं."

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बहस में हिस्सा लेते हुए टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "देश और लोगों के बीच भेद मत कीजिए. हमें गृह मंत्रालय के आंकड़ों से परे जाने की ज़रूरत है. विशेषज्ञ पैनल को दो महीने में नहीं, बल्कि दो दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए."

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गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "कश्मीर में अशांति की कई घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. पाकिस्तान के साथ सिर्फ़ पाक अधिकृत कश्मीर पर वार्ता होगी, कश्मीर पर नहीं.पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
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