'लौट आइए ज़ाकिर जी आप एनआरआई नहीं हैं'

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

भारत के इस्लामी उपदेशक ज़ाकिर नाइक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. वो पिछले कुछ महीनों से देश से बाहर हैं. उनके खिलाफ आरोपों की लिस्ट बढ़ती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वो देश लौटने के मूड में नहीं नज़र आते.

भारतीय मीडिया के अनुसार मुम्बई पुलिस ने उनकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) के, और खुद उनके भाषणों की जांच कर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनकी संस्था कथित तौर पर पैसे देकर धर्म परिवर्तन करती है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि यूट्यूब पर ज़ाकिर नाइक के कुछ भाषण ऐसे हैं जो चरमपंथ को बढ़ावा दे सकते हैं. रिपोर्ट में उनकी संस्था की कमाई के ज़रियों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने की सिफारिश की गयी है.

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पिछले कुछ महीनों से अगर भारतीय मीडिया पर आपकी नज़र हो तो ज़ाकिर नाइक आपकी निगाह में अब तक खलनायक बन चुके होंगे.

भारतीय मीडिया ने रमजान के महीने में ढाका के एक रेस्टोरेंट पर चरमपंथ हमले के बाद उनके खिलाफ कई आरोप लगाए हैं, जिन में ख़ास आरोप ये है कि उनके भाषण मुस्लिम युवाओं को कट्टर बनाते हैं और कई चरमपंथी उनके इस्लामी उपदेश से प्रेरित होते हैं. मीडिया का कहना है कि ढाका हमलों के दो अभियुक्त भी ज़ाकिर नायक से प्रेरित थे.

ज़ाकिर नाइक के मुंबई स्थित कार्यालय ने बार-बार इन आरोपों का खंडन किया है. उनके दफ़्तर का ये भी कहना है कि उनके या उनकी संस्था के खिलाफ जांच की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने अंग्रेजी के एक चैनल के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा भी कर दिया है.

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लेकिन इसके बावजूद ज़ाकिर नाइक के खिलाफ आरोप बढ़ते ही जा रहे हैं. कुछ दिन पहले मुम्बई में अर्शी कुरैशी और रिज़वान खान नाम के दो व्यक्तियों को तथकथित इस्लामिक स्टेट के लिए युवाओं को भर्ती करने के इलज़ाम में गिरफ्तार किया. कुरैशी ज़ाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन में गेस्ट रिलेशन्स अफसर थे. ज़ाकिर नाइक ने कहा कि कुरैशी उनकी संस्था से पूरी तरह से नहीं जुड़ा था. लेकिन इन गिरफ्तारियों के बाद उन पर लगे आरोप और भी बढ़ने लगे.

केंद्र में क़ानून मंत्रालय यूएपीए एक्ट के अन्तर्गत इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर पाबंदी लगाने पर विचार कर रहा है. ये पाबंदी पांच साल के लिए लगाई जा सकती है. ज़ाकिर नाइक ने इस खबर पर प्रक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस पर आश्चर्य है क्योंकि उन्होंने कभी चरमपंथ को बढ़ावा नहीं दिया है तो उनकी संस्था पर पाबंदी क्यों ?

ज़ाकिर नाइक सालों से इस्लाम का खुले आम प्रचार कर रहे हैं. मुम्बई में उनकी सभाओं में काफी भीड़ होती है जिनमें हिन्दू और ईसाई भी काफी संख्या में होते हैं. दुबई से चलने वाले उनके पीस टीवी की पहुँच लंबी है. वो खुद दावा करते हैं कि उनके फॉलोवर्स की संख्या 20 करोड़ है जिसमें कई मुस्लिम देशों के बड़े नेता भी शामिल हैं.

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वो अपनी बेगुनाही की गुहार बार-बार लगा रहे हैं लेकिन फिर भी देश वापस लौटने से साफ़ तौर पर कतरा रहे हैं.

बेहतर तो ये होता कि वो अपनी बेगुनाही देश वापस लौट कर करते. ये कहकर कि वो एक एनआरआई हैं आम जनता को गुमराह कर सकते हैं लेकिन अधिकारियों को नहीं.

ज़ाकिर नाइक एनआरआई नहीं हैं. एनआरआई वो भारतीय होता है जो कुछ सालों के लिए विदेश में रहता है. वो अपना भारतीय पासपोर्ट नहीं बदलता है.

ज़ाकिर नाइक के पास इंडियन पासपोर्ट है. वो केवल कुछ महीनों से देश से बाहर हैं. उनका काम, उनका दफ्तर और उनका परिवार सभी अब भी मुम्बई में है.

लौट आइए ज़ाकिर जी आप एनआरआई नहीं हैं

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