गुजरात हाई कोर्ट ने आर्थिक आरक्षण रद्द किया

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गुजरात में आर्थिक रूप से पिछड़े अनारक्षित वर्ग के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण नहीं मिल पाएगा.

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की आनंदी बेन सरकार के उस फ़ैसले को रद्द कर दिया है जिसमें आर्थिक रूप से पिछड़े 'सवर्णों' को 10 फ़ीसद आरक्षण दिया जाना था.

हाईकोर्ट ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता.

अहमदाबाद से स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल के अनुसार इस फ़ैसले के बाद आनंदीबेन पटेल के बाद गुजरात का मुख्यमंत्री बनने वाले शख़्स को खासी चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा.

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सरकार के खिलाफ़ बहुजन जातियों में लगातार उभरता असंतोष और पाटीदार आंदोलन के कारण आनंदीबेन को अपनी कुर्सी गवांनी पड़ रही है.

अब जो भी उनकी जगह लेगा उसे इस फ़ैसले की तपिश भी झेलनी पड़ेगी.

गुजरात सरकार ने कुछ माह पहले ही आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्णों जातियां के लोगों को दस प्रतिशत आरक्षण देने का अध्यादेश पारित किया था.

कोर्ट ने यह आदेश उन याचिकाओं के संदर्भ में दिया है जिनमें कहा गया था कि यह अध्यादेश आरक्षण की तयशुदा सीमारेखा से ज़्यादा आरक्षण का प्रावधान करता है.

आरक्षण पचास फीसदी से अधिक नहीं दिया जा सकता है.

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गुजरात में आरक्षण को लेकर चल रहे पाटीदार आंदोलन के कारण पंचायत के चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हुआ था.

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2017 में विधानसभा के चुनाव होने हैं इसी वजह से आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का फ़ैसला किया गया था.

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