बाबरी मामले के बुज़ुर्ग मुद्दई हाशिम अंसारी नहीं रहे

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि के सबसे उम्रदराज़ मुद्दई हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में अयोध्या में निधन हो गया है.
उनके बेटे इक़बाल अंसारी ने पत्रकार समीरात्मज मिश्र को बताया कि बुधवार सुबह वो नमाज़ के लिए नहीं उठे थे, तो परिवारवालों ने पाया की उनकी मृत्यु हो चुकी है.
हाशमि अंसारी की नमाजे जनाजा बुधवार शाम पांच बजे शहीद मसजिद में होगी.
हाशिम अंसारी की मौत की ख़बर आते ही उन्हें श्रद्धांजलि देने लोग उनके घर पहुंचने लगे. महंत ज्ञानदास ने कहा, '' मैंने अपना मित्र खो दिया है.''
वहीं रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास भी उनके घर पहुंचे और कहा कि हाशिम मुसलिम पक्ष के ताक़तवर पक्षकार थे.

अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन मिश्र ने हाशिम के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि हाशिम हिंदू-मुस्लिम दोनों के चहेते थे.
साठ साल से ज़्यादा समय तक बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले हाशिम अंसारी के स्थानीय हिंदू साधु-संतों से रिश्ते कभी ख़राब नहीं हुए.
वर्ष 2010 में बीबीसी से बातचीत में हाशिम अंसारी ने कहा था, "मैं सन 1949 से मुक़दमे की पैरवी कर रहा हूँ, लेकिन आज तक किसी हिंदू ने हमको एक लफ़्ज़ ग़लत नहीं कहा. हमारा उनसे भाईचारा है. वो हमको दावत देते हैं. मै उनके यहाँ सपरिवार दावत खाने जाता हूँ."

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विवादित स्थल के दूसरे प्रमुख दावेदारों में निर्मोही अखाड़ा के राम केवल दास और दिगंबर अखाड़ा के राम चंद्र परमहंस से हाशिम की अंत तक गहरी दोस्ती रही.
परमहंस और हाशिम तो अक्सर एक ही रिक्शे या कार में बैठकर मुक़दमे की पैरवी के लिए अदालत जाते थे और साथ ही चाय-नाश्ता करते थे.
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