'मेरे टैलेंट हंट में मोदी ड्रम बजाते तो ख़ूब नंबर देती'

मोदी ड्रम बजाते हुए

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भारत के प्रधानमंत्री के अफ़्रीका दौरे पर रविवार को तंज़ानिया में उनके स्वागत के लिए पारंपरिक ड्रम बजाया जा रहा था.

नरेंद्र मोदी ने भी तंज़ानिया के राष्ट्रपति जोसेफ मगुफुली के साथ मिलकर एक मिनट तक ड्रम बजाया.

मोदी और मगुफुली को ताल से ताल मिलाते देखना काफ़ी दिलचस्प था.

एक बार तो तंज़ानिया के राष्ट्रपति जोसेफ मगुफुली ड्रम बजाते हुए रुक भी गए, लेकिन नरेंद्र मोदी के लय और ताल को देखकर उन्होंने भी मिलकर जुगलबंदी शुरू कर दी.

मोदी और तंज़ानिया के राष्ट्रपति

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प्रधानमंत्री मोदी के इस अंदाज़ पर बीबीसी ने जानी मानी गायिका इला अरुण और संगीतकार बप्पी लाहिड़ी से बात की. आइए जानते हैं उनका क्या कहना है-

इला अरुण ने कहा-

जब भी वो ढोल या ड्रम देखते हैं तो एक्साइट हो जाते हैं, क्योंकि आप अपना बचपना नहीं भूल सकते हैं. आप अपने बचपन का टैलेंट नहीं भूल सकते हैं.

आप किसी भी पद पर बैठे हों, आप अपना शौक या स्वभाव बदल नहीं सकते हैं. उनके अंदर ऐसा है कि जब ये सब चीजें बजती हैं तो उनको अच्छा लगता है और वो चाहते हैं कि मैं इन्हें बजाउँ.

वैसे तो कुछ लोग फ़ोटो के लिए ऐसा करते हैं, जो करना पड़ता है. जब दुनियाभर के नेता कहीं जाते हैं, तो कहीं की टोपी पहन लेते हैं, कहीं की पगड़ी लगा लेते हैं.

मोदी ड्रम बजाते हुए

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लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के अंदर कुछ ऐसा है जो उन्हें मजबूर कर देता है कि दो पल सुर-ताल में गुज़ारे जाएँ. ये उनका नैचुरल टैलेंट है.

मैंने जब भी न्यूज़ में देखा है तो वो यह भी कोशिश करते हैं कि उनके साथ जुगलबंदी करने वाला कोई हो.

आप वाद्य यंत्र बजाकर भी लोगों के साथ संवाद कर सकते हैं. लेकिन ऐसा आप तभी कर सकते हैं जब आपको सुर-ताल के बारे में पता हो... और उनको ये पता है.

मैंने एक बार देखा था कि जब वो नए नए निर्वाचित हुए थे, तो गंगा आरती के दौरान वो ये भूल गए कि कितने कैमरे उन्हें देख रहे हैं, वो पूरी तरह से मग्न हो गए.

उन्होंने कभी ये तो नहीं कहा है कि मैं ज़ाकिर हुसैन या रवि शंकर हूँ. उनके अंदर प्रतिभा है और मेरे टैलेंट हंट में बैठते तो मैं उनको बहुत नंबर देती.

बप्पी लाहिड़ीः

मोदी तंज़ानिया के राष्ट्रपति से हाथ मिलाते हुए

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मैं उनका क़रीबी दोस्त हूँ. मैं उनके पास जाता रहता हूँ. उन्हें संगीत का बड़ा शौक है और हमेशा संगीत के बारे में पूछते रहते हैं.

उनको ड्रम बजाने का बहुत शौक हैं, इनसे उनका बहुत लगाव है. उन्होंने मेघालय में भी ड्रम बजाया था.

ड्रम एक खुशी का संकेत है. मैं ख़ुद तबला बजाता हूँ. किसी देश में जाकर ड्रम बजाना खुशी का संकेत है, इसने दोनों देशों को मिलाया है.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय के साथ बातचीत पर आधारित)

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