बिहार पुलिस को भी चाहिए विजय माल्या

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    • Author, शिवानंद गिरि
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

विजय माल्या के ख़िलाफ़ इंटरनेशनल वारंट जारी हुआ है, लेकिन बिहार में भी कोई उनसे बकाया वसूली की कोशिश कर रहा है.

बिहार के बेगूसराय ज़िले की अदालत ने माल्या की गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है.

शराब कारोबारी विजय माल्या की कंपनी यूबी इंजीनियरिंग ने बरौनी रिफ़ाइनरी के विस्तार के दौरान साल 2002 में रिलांयस कंपनी से एक ठेका लिया था.

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इस ठेके के तहत कंपनी को बिहार के कुछ ज़िलों में ऑप्टिक फ़ाइबर केबल बिछाने और पेट्रोल पंप बनाने थे. यूबी इंजीनियरिंग ने यह ठेका आरबी कंस्ट्रक्शन नाम की एक स्थानीय कंपनी को दे दिया, आरबी कंस्ट्रक्शन को अररिया में केबल बिछाना और गया में पेट्रोल पंप बनाना था.

कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम किया और शुरू में उसे इसका कुछ भुगतान भी हुआ.

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आरबी कंस्ट्रक्शन के मालिक रंजन कुमार के मुताबिक़, "क़रीब सवा दो करोड़ रुपए का काम जब ख़त्म हो गया तो हमारी कंपनी ने बकाया 1 करोड़ 52 लाख रुपए का बिल दिया. तब से पेमेंट में परेशानी होने लगी."

"25 मई 2005 को यूबी इंजीनियरिंग ने हमें 25 लाख का चेक दिया जो 1 जून 2005 को बाउंस हो गया. इसी दौरान कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित दूसरे लोग दफ़्तर छोड़कर भाग गए.’’

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रंजन बताते हैं कि कई क़ानूनी नोटिस भेजने के बाद भी न तो जबाव मिला और न संपर्क हुआ. तब उन्होंने बेगूसराय कोर्ट में 18 अक्टूबर 2006 को केस दायर किया. ये केस यूबी इंजीनियरिंग के सीएमडी विजय माल्या और कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक पॉल के ख़िलाफ़ किया गया.

आरबी कंस्ट्रक्शन के वकील अजय कुमार बताते हैं कि कोर्ट ने यूबी इंजीनियरिंग के सीएमडी विजय माल्या और उनकी कंपनी के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक पॉल को समन जारी किए, पर वे कोर्ट में पेश नहीं हुए. इसके बाद कोर्ट ने दोनों के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया है."

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विजय माल्या इस समय ब्रिटेन में हैं, उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया है. ऐसे में सवाल है कि क्या बेगूसराय अदालत के आदेश की तामील हो पाएगी?

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