वो हिंदू, जिन्हें पसंद है मुस्लिम लीग

मुस्लिम लीग झंडा
    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, केरल के चेरथला से

पहले मैं भी सोचता था कि मुस्लिम लीग मुसलमानों की पार्टी है फिर मैंने थोड़ा जानकारी बढ़ाई और देखा कि ख़ासकर केरल के उत्तरी इलाकों में ये पार्टी दलित, पिछड़ी जाति और आदीवासी तक को साथ लेकर चलती है, एकदम धर्म-निरपेक्ष है- ये कहना है कि डी रघुनाथ पनावेली का.

पनावेली के मन में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी आईयूएमएल के बारे में कई सवाल थे.

मुस्लिम लीग समर्थक रघुनाथ

लेकिन आठ साल पहले वह इस पार्टी में जुड़ गए और अब कहते हैं कि मुस्लिम लीग ने उन्हें “निराश” नहीं किया बल्कि किसी और पार्टी में शायद उन्हें इतनी इज़्ज़त नहीं मिलती.

मुस्लिम लीग का नाम लेते ही ज़हन में आज़ादी से पहले की वह पार्टी आती है जिसकी मांग पर ही भारत का बंटवारा हुआ था.

भारत के चेन्नई में 10 मई 1948 को एक नई पार्टी आईयूएमएल का गठन हुआ.

मुस्लिम लीग रैली

आईयूएमएल केरल में एक ख़ास पार्टी बनकर उभरी है. मौजूदा विधानसभा में उसके 20 विधायक हैं. विधायक वीके इब्राहिम कुंजू सरकार में लोक कल्याण मामलों के मंत्री भी हैं.

अपने रोड-शो के दौरान बीबीसी से बातचीत में वे कहते हैं, “आईयूएमएल एक बहुत अलग पार्टी है, एकदम धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक. हम कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं और हमारी पार्टी का 40 साल का इतिहास है.”

मुस्लिम लीग प्रत्याशी

पर अलग सिर्फ़ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग नहीं बल्कि केरल का समाज और राजनीति भी है.

रोड-शो जहां से गुज़रता है वहीं सबना और उसकी सहेलियां खड़ी हैं. मैं लपक के सबना से पूछती हूं- आपका मज़हब क्या है और आप किस पार्टी को वोट डालती हैं?

सबना थोड़ा नाराज़ होकर कहती हैं, “धर्म से मैं मुसलमान हूं पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं मुस्लीम लीग को ही वोट दूं."

मुस्लिम लीग समर्थक सबना

"वैसे भी मुस्लिम लीग कई धर्मों की पार्टी है और केरल में हम धर्म पर नहीं इंसान के काम पर वोट देते हैं, मेरी पसंद की पार्टी कांग्रेस है.”

पास के एक और मोहल्ले में कुछ हिंदू और मुसलमान मिलकर राजनीति के इस नए पाठ को समझाने की कोशिश करते हैं.

मुस्लिम लीग समर्थक शाहजहान

देड्डी देवी की माला की ओर इशारा कर शाहजहान कहते हैं, “आईयूएमएल केरल में एक चेन की तरह है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी साथ आते हैं.”

देड्डी देवी कहती हैं कि देश की राजनीति और केरल के माहौल में बहुत फ़र्क है, “देश की सरकार तो बदल गई पर केरल में बीजेपी की बात कोई पसंद नहीं करेगा, यहां सब दोस्ताना रिश्ते बनाकर रहना पसंद करते हैं.”

मुस्लिम लीग समर्थक देड्डी देवी

इन सभी दावों से अलग निर्मल आइप के लिए एक टेस्ट सबसे निर्णायक था.

निर्मल आइप कॉलेज के दिनों में वाम मोर्चे के छात्र संघ में काम करते थे पर समय के साथ उनका विश्वास वहां से हटकर आईयूएमएल पर बन गया और वह उससे जुड़ गए.

उनके मुताबिक, “जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया, यहां भी मुसलमान लोगों में बहुत नाराज़गी थी, पर आईयूएमएल ने तय किया कि वह दंगे नहीं भड़कने देंगे और उनके कार्यकर्ताओं ने सभी मंदिरों की रखवाली की.”

निर्मल

निर्मल, जो धर्म से ईसाई हैं, बताते हैं कि उसके बाद जो चुनाव हुए उसमें आईयूएमएल को इस रणनीति की वजह से बहुत सीटें गंवानी पड़ीं पर पार्टी की विचारधारा आज तक नहीं बदली गई.

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