केरल की तुलना सोमालिया से कितनी जायज़?

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पिछले साल बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जो प्रहार किया था उससे नीतीश आज भी नाराज़ हैं.

अब केरल विधान सभा चुनावी मुहिम के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्य की तुलना सोमालिया से करके मुख्यमंत्री ओमन चांडी की नाराज़गी भी मोल ले ली है.

चांडी के अनुसार मोदी ने प्रधानमंत्री के कार्यालय को अपमानित किया है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई तो वो केरल में गुजरात विकास मॉडल लागू करेंगे.

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सवाल ये है कि क्या ये केवल चुनावी 'जुमला' है या फिर प्रधानमंत्री सच में ये मानते हैं कि केरल सोमालिया की तरह है जिसे गुजरात विकास मॉडल की ज़रुरत है?

ताज़ा सरकारी आंकड़ों पर एक नज़र डालें तो केरल की सोमालिया से किसी भी श्रेणी में तुलना नहीं की जा सकती. उधर मानव विकास सूची के सभी मापदंड में केरल गुजरात से कहीं आगे है.

साल 2014-2015 में जारी किये आंकड़ों के अनुसार मानव विकास सूची में पूरे देश में केरल पहले नंबर पर है जबकि गुजरात 12वें स्थान पर है.

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गुजरात इस सूची में राष्ट्रीय औसत से भी कुछ नीचे है. मानव विकास सूची में प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा (साक्षरता दर), औसत आयु और स्वास्थ्य इत्यादि को विकास का पैमाना माना जाता है.

एचडीआई 2014-15

केरल 1

गुजरात 12

प्रति व्यक्ति आय

गुजरात नंबर 10 (1. 6 लाख रुपए)

केरल नंबर 11 (1. 3 लाख रुपए)

साक्षरता दर (2011 जनगणना)

केरल नंबर 1 (93.91%)

गुजरात नंबर (79. 39%)

औसत आयु

केरल नंबर 1 (74.2 साल)

गुजरात नंबर 9 (66.8 साल)

पुरुष-महिला अनुपात (प्रति 1000 पुरुषों में)

केरल नंबर 1 (1058 महिलायें)

गुजरात 25 (918 महिलायें)

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मानव विकास सूची में केरल न केवल गुजरात से कहीं आगे है बल्कि कई श्रेणी में ये पहले पायदान पर है.

प्रति व्यक्ति आय में दोनों राज्यों में मुक़ाबला टक्कर का है और कोई अधिक फ़र्क़ नहीं है. लेकिन केरल के लोगों की जीवन की गुणवत्ता गुजरात के लोगों से कहीं बेहतर है.

प्रधानमंत्री के केरल को गुजरात मॉडल में बदलने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए केरल के कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि भाई गुजरात का विकास मॉडल प्रधानमंत्री को ही मुबारक हो.

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दरअसल गुजरात और केरल मॉडल के बीच तुलना करना उचित नहीं होगा. दोनों अलग-अलग मॉडल हैं, एक दुसरे से जुदा हैं. केरल का झुकाव सामाजिक विकास की तरफ़ नज़र आता है जबकि गुजरात में व्यपार और उद्योग के विकास पर अधिक ज़ोर दिया जाता है.

केरल में राज्य सरकारें सालों से शिक्षा और स्वास्थ्य में पैसे ख़र्च करती आ रही हैं जिसके फलस्वरूप केरल इन श्रेणियों में भारत का सबसे विकसित राज्य है.

दूसरी तरफ़ केरल में निजी संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों ने समाज जीवन स्तर के विकास के लिए सालों से काम काम किया है. केरल की पंचायतों ने गावों के विकास में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है.

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केरल की अर्थव्यवस्था सेवा उद्योग पर टिकी है लेकिन गुजरात एक औद्योगीकृत राज्य है. व्यापार और निवेश के बेहतर माहौल के कारण राज्य में विदेशी निवेश अरबों डॉलर का हुआ है. व्यापर फलफूल रहा है. गुजरात के बुनियादी ढाँचे केरल से कहीं बेहतर हैं.

अगर आपको जीवन की गुणवत्ता पसंद है और अगर आप उन लोगों में से हैं जो कहते हैं कि जान है तो जहान है तो आप केरल मॉडल को पसंद करेंगे. लेकिन अगर आप महमूद के 'सब से बड़ा रुपैया' गाने को सुन कर मस्त हो जाते हैं तो आपको गुजरात अधिक पसंद आएगा.

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