उत्तराखंड में शक्ति परीक्षण पूरा, नतीज़ा कल

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- Author, शिव जोशी
- पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
उत्तराखंड विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ शक्ति परीक्षण पूरा हो गया है. सदन की कार्यवाही क़रीब एक घंटे में ही पूरी हो गई.
मीडिया की गहमागहमी और भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच सबसे पहले बीजेपी के विधायक बाहर निकले. उनकी बॉडी लैंग्वेज से नतीजों का सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता था.
नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के बाहर आते ही मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया.
उन्होंने कहा कि नतीजों की घोषणा सुप्रीम कोर्ट में होगी. लेकिन उन्होंने ये भी जोड़ा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. अंतरात्मा पर वोट करने के हमारे आह्वान को कुछ ने सुना कुछ ने नहीं."
कुछ ही देर बाद हरीश रावत भी अपने विधायकों के साथ बाहर निकले. उनके साथ विधायकों का हुजूम था. और कुछ विधायक अंगुलियों से वी का निशान भी बनाते देखे गए.

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निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वो सदन के भीतर की गतिविधि पर टिप्पणी नहीं करेंगे और जो कहेंगे नियमों के तहत ही कहेंगे.
रावत ने कहा, "माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से करवाई गई वोटिंग. वोटिंग के निष्कर्ष सीलबंद लिफाफे में हैं. और सुप्रीम कोर्ट ही उसका संज्ञान लेकर निष्कर्ष घोषित करेगा. हम माननीय न्यायपालिका को बहुत धन्यवाद देते हैं. हम कल के दिन की बहुत उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा करेंगे."
आज सुबह जब कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के बीच विधायकों ने विधानसभा पहुंचना शुरू किया तो कांग्रेस विधायक रेखा आर्य बीजेपी खेमें में खड़ी देखी गईं.
इससे स्पष्ट हो गया कि बीजेपी से भीमलाल आर्य अगर कांग्रेस खेमें में गए तो कांग्रेस से रेखा आर्य बीजेपी में जा मिलीं.

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इस तरह फ्लोर टेस्ट से पहले सदन के भीतर का जो गणित नज़र आया था, उसके मुताबिक़ बीजेपी के पास 28 विधायक हैं.
कांग्रेस के पास 27 विधायक हैं. उसे तीन निर्दलीय, दो बीएसपी, एक यूकेडी विधायक का समर्थन भी हासिल है. इन छह विधायकों ने मिलकर जनतांत्रिक मोर्चा यानी पीडीएफ बनाया है.
एक वोट नामांकित सदस्य का भी कांग्रेस के खाते में है. इस तरह कांग्रेस की संख्या 34 की हो गई.
सदन में 62 सदस्य उपस्थित थे. कांग्रेस के नौ बागियों को फ्लोर टेस्ट में शामिल होने से पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी मना कर दिया था.

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कांग्रेस के लिए एक तरह से ऑक्सीजन का काम करने की ज़िम्मेदारी पीडीएफ़ के पास थी.
पीडीएफ के नेता मंत्री प्रसाद नैथानी ने सीधे बीजेपी गठबंधन पर निशाना साधा. उन्होंने एनडीए को नॉन डेवलेपमेंटल एसोसिएशन करार दिया.
स्थानीय बोली, गढ़वाली में एक मशहूर कहावत के हवाले से नैथानी ने चुटकी भी ली, "मारी बल बाखरु, भड़याई कोखड़ु और निकली लेंगड़ु." यानी खाने के लिए बकरा मारा. उसे भुना तो मुर्गा निकला और जब खाने के लिए बाहर निकाला तो लेंगड़ा (एक स्थानीय वनस्पति जिसकी सब्ज़ी बनाई जाती है) मिला.

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बीएसपी के दो विधायकों को लेकर कल तक अटकलें थीं कि वे किस ओर वोट करेंगे. लेकिन बीएसपी प्रमुख मायावती ने ये संदेह दूर कर दिया. उन्होंने कहा, "हमारा स्टैंड आप सब लोगों को अच्छे से पता है कि हम सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ते रहे हैं. हमारे विधायक कांग्रेस के पक्ष में वोट करेंगे."
विधानसभा परिसर के आसपास भारी हलचल और गहमागहमी के बीच "अंतरात्मा की आवाज़" को लेकर लोग चुटकियां लेते भी देखे-सुने गए.
असल में बीजेपी शुरू से ही कांग्रेसी विधायकों को अपनी ओर करने के संदर्भ में इस वाक्यांश का इस्तेमाल करती आ रही थी.
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