बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

विजय बहुगुणा और हरीश रावत
    • Author, शिव जोशी
    • पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

कांग्रेस के बाग़ी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फ़ैसले को सही ठहराने वाले नैनीताल हाई कोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इन विधायकों के वकील को उस पीठ के पास जाने को कहा जिसने फ़्लोर टेस्ट का आदेश दिया है.

इससे पहले नैनीताल हाई कोर्ट ने सोमवार सुबह कांग्रेस के नौ बाग़ी विधायकों की सदस्यता को अयोग्य बताने वाले विधानसभा अध्यक्ष के फ़ैसले को सही ठहराया.

उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इन विधायकों की सदस्यता दलबदल क़ानून के तहत रद्द कर दी थी.

विधानसभा अध्यक्ष के फ़ैसले को इन विधायकों ने नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

हाई कोर्ट के जज यूसी ध्यानी के पीठ ने शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.

इस फ़ैसले के बाद बागी नेताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें कोई परेशानी नहीं है. बागी नेता उमेश शर्मा ने कहा, '' हमें कोर्ट ने कहा है कि स्पीकर के पास आप पुनर्विचार के लिए जा सकते हैं. वैसे हम सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील दायर करेंगे. हमें फैसले की कॉपी का इंतज़ार है."

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंक्षी विजय बहुगुणा और हरीश रावत.

उधर, इस फैसले से कांग्रेस की जान में जान आई है. वरिष्ठ नेता इंदिरा हृदयेश का कहना है, "विधानसभा अध्यक्ष जी ने विधिसम्मत, न्यायसम्मता और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपना फ़ैसला दिया था. आज हाईकोर्ट ने उस पर मुहर लगा दी. दस मई में अब समय ही कितना बचा है. कल दिख जाएगा कि बहुमत किसका है."

सुप्रीम कोर्ट ने हरीश रावत को 10 मई को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विश्वास मत के दौरान कांग्रेस के बागी विधायकों का मतदान हाई कोर्ट के फ़ैसले पर निर्भर करेगा.

हाई कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद रावत के विश्वास मत जीतने की संभावना बढ़ गई है.

हरीश रावत.

इमेज स्रोत, PTI

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की आज दिल्ली में स्टिंग मामले को लेकर सीबीआई के सामने पेशी थी. लेकिन फिलहाल उन्होंने देहरादून में ही टिके रहना उचित समझा.

वैसे इस बारे में विधानसभा स्पीकर को एक अनुरोध पत्र भी दिया गया था. इसमें कहा गया था कि फ्लोर टेस्ट की तारीख और सुरक्षा कारणों को देखते हुए हरीश रावत का दिल्ली जाना संभव नहीं हो पाएगा.

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