बाग़ी विधायकों पर हाईकोर्ट का फ़ैसला 9 को

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- Author, शिव जोशी
- पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नौ बाग़ी कांग्रेसी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है और अदालत ने अपना फ़ैसला नौ मई तक के लिए सुरक्षित रख लिया है.
अदालत, विधानसभा अध्यक्ष के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुनवाई कर रहा था जिसमें विधायतों की सदस्यता ख़त्म कर दी गई थी.
मामला हाईकोर्ट में जस्टिस यूसी ध्यानी की एकल बेंच में सुनवाई के लिए क़रीब महीने भर पहले आया था.

नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई को कवर कर रहे टीवी पत्रकार वीरेंद्र बिष्ट ने बीबीसी को बताया, "सुनवाई के दौरान बाग़ी विधायको के अधिवक्ता सीए सुंदरम ने कोर्ट में दलील दी कि ये दलबदल का मामला नहीं है तो स्पीकर ने उन्हें अयोग्य कैसे ठहरा दिया."
सुंदरम ने कोर्ट में कहा कि किसी भी विधायक ने पार्टी नहीं छोड़ी है.
उन्होंने कोर्ट से, बाग़ी विधायकों को फ़्लोर टेस्ट में शामिल होने की अनुमति देने की अपील भी की.

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बागियों के वकील की ओर से ये भी कहा गया कि उन विधायकों ने पार्टी के ख़िलाफ़ कोई काम नहीं किया था और उनकी नाराज़गी एक नेता से हो सकती है, इसका अर्थ ये नहीं कि उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए.
उधर स्पीकर की ओर से वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अमित सिब्बल ने ये कहते हुए स्पीकर के फ़ैसले का बचाव किया कि सदन में 18 मार्च को इन विधायकों का रवैया सरकार और पार्टी विरोधी ही था.
इन लोगों ने विनियोग विधेयक का भी विरोध किया.
सिब्बल का कहना था कि ये विधायक बीजेपी विधायकों के साथ बस में बैठकर राज्यपाल को ज्ञापन देने भी गए और उसके बाद चाटर्ड विमान में बीजेपी के नेताओं के साथ दिल्ली भी गए.

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सुप्रीम कोर्ट ने दस मई को विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दिया है.
इस मौक़े पर पर्यवेक्षक भी तैनात रहेंगे. जो भी नतीजा आएगा उसकी घोषणा सुप्रीम कोर्ट में ही होगी.
फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को सीबीआई ने पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है.
उन पर कथित रूप से विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त का आरोप लगाते हुए एक सीडी जारी की गई थी.
हरीश रावत का आरोप है कि, "इससे सीबीआई की निष्पक्षता पर अंगुली उठ रही है. फ्लोर टेस्ट के बाद जब कहते तब आ जाते, कोई दिक्क़त नहीं है. बिल्कुल सहयोग करेंगे. सौ प्रतिशत सहयोग करेंगे."
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