'मेरे वीज़ा को चीन से जोड़कर न देखें'

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- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
चीन के बागी वीगर नेता डॉल्कन ईसा ने अपने इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा को 'रद्द' किए जाने के भारत सरकार के कदम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है.
डॉल्कन ईसा को भारतीय वीज़ा दिए जाने को कुछ प्रेक्षक चीन को भेजे इशारे के तौर पर देख रहे थे लेकिन ईसा ने कहा कि इन दोनो बातों को जोड़कर देखना गलत है.
चीन उन्हें 'चरमपंथी' मानता है और वह उनके नाम रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुका है.
उन्होंने कहा, “इस तरह की अनुचित तुलना से वीगर मानवाधिकारों के बारे में दशकों से जारी मेरे अहिंसक आंदोलन पर बुरा प्रभाव पड़ता है. चीन जिस तरह रेड कॉर्नर नोटिस का गलत इस्तेमाल कर रहा है, वो चिंताजनक है.”
संयुक्त राष्ट्र में चीन ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने की भारतीय कोशिशों को रोक दिया था.
भारत सरकार से डॉल्कन ईसा के वक्तव्य पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

डॉल्कन ईसा 28 अप्रेल से एक मई तक हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में चीन के विभिन्न गुटों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले थे.
अमरीका की एक ग़ैर-सरकारी संस्था ने इस सम्मेलन का आयोजन किया था. ईसा को भारतीय वीज़ा दिए जाने पर चीन ने नाराज़गी जताई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, डॉल्कन ईसा की प्रस्तावित भारत यात्रा पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था, "डॉल्कन आतंकवादी हैं और उनके खिलाफ़ इंटरपोल और चीन की पुलिस का रेड कॉर्नर नोटिस है. सभी देशों का कर्तव्य है कि उन्हें सज़ा दिलाएँ."

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डॉल्कन ईसा खुद को “शांतिप्रिय” बताते हैं और अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हैं.
बीबीसी से बातचीत में डॉल्कन ईसा ने कहा था कि वो भारत तभी आएंगे जब भारत सरकार उन्हें लिखित में उनकी <link type="page"><caption> सुरक्षा</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/04/160422_uyghur_india_china_vk.shtml" platform="highweb"/></link> की गारंटी देगी.
सोमवार को भेजे अपने वक्व्य में डॉल्कन ईसा ने कहा कि ये पहली बार नहीं है जब उनके अंतरराष्ट्रीय दौरे में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है.
सितंबर 2009 में जब वो एक सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे थे तो उन्हें दक्षिण कोरिया में हिरासत में ले लिया गया था.

ईसा ने कहा कि 23 अप्रेल को उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया.
ईसा ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से वीगर समुदाय के भारतीय लोगों से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं. 1949 में जब वीगर नेता ईसा युसुफ़ एल्पटेकिन और वीगर शरणार्थी चीन से भागे थे तो भारतीय सरकार ने उनकी मेज़बानी की थी.”
धर्मशाला में होने वाले सम्मेलन का मक़सद चीन के विभिन्न बौद्ध, वीगर, दक्षिण मंगोलियाई, फ़ालुनगांग और अन्य धार्मिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना है.
इस सम्मेलन की आयोजक अमरीका स्थित संस्था 'सिटीज़न पावर फ़ॉर चाइना' की यांग चियान ली वर्ष 1989 के तियानमन स्क्वेयर प्रदर्शनों में शामिल थीं.
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