शनि मंदिर में प्रवेश से महिलाओं को रोका गया

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बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद क़रीब 25 महिलाओं ने शनिवार को शनि शिंगणापुर मंदिर में घुसने की कोशिश की लेकिन उन्हें रोक लिया गया.
ये सभी भूमाता ब्रिगेड की थीं और संगठन की प्रमुख तृप्ति देसाई के साथ वहां पहुंची थी.
पुलिस ने देसाई समेत दूसरी महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है. देसाई ने प्रवेश न दिए जाने को अदालत का अपमान बताया.
उन्होंने कहा,''कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगर कोई महिला मंदिर में प्रवेश करना चाहती है तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा देनी चाहिए और मंदिर में जाने दिया जाना चाहिए. यहां स्थानीय लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं हमारे साथ धक्का मुक्की कर रही है. गृह मंत्री कहां है?''

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भूमता ब्रिगेड की महिलाओं ने जैसे ही मंदिर में प्रवेश की कोशिश की उन्हें ग़ुस्साई स्थानीय महिलाओं और शनिश्वर देवास्थान ट्रस्ट के लोगों ने रोक दिया.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फ़ैसला दिया था कि किसी भी धार्मिक स्थान में पूजा अर्चना करने का हक़ महिलाओं के मूलभूत अधिकार में शामिल है. कोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर में प्रवेश करने के मामले में क़ानून को कड़ाई से लागू करने के आदेश दिए थे.
देसाई का कहना था, ''राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि महिलाओं को सुरक्षा दी जाएगी. तो क्या मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे थे? हम मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करेंगे और चबूतरे पर दर्शन लिए बग़ैर पीछे नहीं हटेंगे.''
महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करेगी और अगर औरतों को मंदिर में प्रवेश से रोका गया तो क़ानून के मुताबिक़ उसके ख़िलाफ़़ कार्रवाई होगी.

इससे पहले भी तृप्ति देसाई ने शनि शिगणापुर मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों ने रोक दिया था.
ये मामला 29 नवंबर को सामने आया था जब एक महिला ने अहमदनगर ज़िले के शनि शिगणापुर मंदिर में चबूतरे पर चढ़कर शिला पर तेल चढ़ा दिया था. इसके बाद पुजारियों ने कहा कि शनि देव अपवित्र हो गए हैं और उनका दूध से अभिषेक किया जाएगा.
शिगणापुर में शनि शिला एक चबूतरे पर है और इस चबूतरे पर महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं है.
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