आईएस के आर्थिक स्रोत को रोकने का प्रस्ताव मंज़ूर

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 स्थायी और अस्थायी सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों ने आम राय से एक प्रस्ताव मंज़ूर किया है जिसका मक़सद तथाकथित इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के स्रोतों को रोकना है.

ये 1999 के उस प्रस्ताव पर आधारित है जो सबसे पहले अल क़ायदा को निशाना बनाने के लिए पारित किया गया था.

प्रस्ताव में सभी देशों से आग्रह किया गया है कि वो इस्लामिक स्टेट को होने वाली आमदनी को रोकने के लिए 'तेज़ी से और निर्णायक क़दम' उठाएं.

प्रस्ताव में ऐसे उपाय करने की अपील की गई है ताकि आईएस को तेल और प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने से रोका जा सके.

सुरक्षा परिषद में ऐसा ही प्रस्ताव इस साल फरवरी में पारित किया गया था, लेकिन राजयनिकों ने नियमित रूप से उसके उल्लंघन की शिकायतें कीं.

इस्लामिक स्टेट को दुनिया का सबसे अमीर चरमपंथी संगठन माना जाता है.

एक हालिया अध्ययन के अनुमान के मुताबिक़ उसे हर महीने आठ करोड़ डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है.

सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव मंज़र होने के बाद जो भी व्यक्ति या समूह आईएस की मदद करेगा, उस पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लागू होंगे.

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