जेल में ही रहेंगे राजीव गांधी के हत्यारे

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी की सज़ा को माफ़ करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, राज्य सरकार के पास नहीं.
अदालत राजीव गांधी की हत्या के दोष में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे सात दोषियों की सज़ा माफ़ करने के तमिलनाडु के फ़ैसले के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ के इस फ़ैसले के बाद राजीव गांधी की हत्या के सातों दोषी जेल में ही रहेंगे. तमिलनाडु की सरकार ने उन्हें रिहा करने का फ़ैसला किया था.

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अदालत ने कहा कि जिस मामले की जांच में केंद्रीय एजंसियां जुड़ी हों या जिनको केंद्रीय क़ानून के तहत सज़ा हुई हो, उनमें सज़ा माफ़ी का अधिकार केंद्र सरकार का है, राज्य सरकार का नहीं.
अदालत ने कहा कि उम्रक़ैद का मतलब ज़िंदगी भर क़ैद में ही रखना होता है.
तमिलनाडु की जयललिता सरकार ने पिछले साल राजीव गांधी की हत्या के दोष में जेल में बंद सात क़ैदियों की रिहाई के लिए केंद्र सरकार से सिफ़ारिश की थी.
राजीव गांधी की हत्या के दोष में संथन, मुरूगन, पेरारिवलन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन जेल में सज़ा काट रहे हैं.
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