रॉबर्ट वाड्रा क्या केवल चुनावी मुद्दा ही हैं?

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    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से

'दामादश्री' के कथित भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में आख़िर रॉबर्ट वाड्रा कहां हैं?

भाजपा मुख्यालय में पिछले साल 27 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेल में रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा और बीकानेर से सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने 'दामादश्री' नाम की एक आठ मिनट की फ़िल्म दिखाई थी. इसके साथ ही अंग्रेज़ी में एक बुकलेट भी जारी की गई थी.

'दामादश्री' में रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ कई तरह के आरोप लगाए गए थे जिनमें घोटालों का बादशाह, देश का सौदागर और किसानों का अपराधी जैसी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया था.

ये भी बताया गया था कि इन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का राजनीतिक संरक्षण हासिल है.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोनिया और राहुल गांधी से रॉबर्ट वाड्रा के विकास का मॉडल बताने को कहा था. उन्होंने कांग्रेस शासित राज्य सरकारों पर वाड्रा के 'महल को खड़ा करने में सहयोग' देने का आरोप लगाया था.

भाजपा ने लोकसभा चुनाव के प्रचार में रॉबर्ट वाड्रा के मामले को ज़ोर-शोर से उठाया था.

भाजपा ने घरेलू हवाई अड्डों पर रॉबर्ड वाड्रा का नाम नो फ्रिस्किंग (सुरक्षा जांच से मुक्त) सूची में होने को राजनीतिक दुरुपयोग का मामला बताया. इस सूची में राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री आदि शामिल हैं.

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लोकसभा के चुनाव प्रचार में छत्तीसगढ़ के बिश्रामपुर में प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''एक दसवीं कक्षा में पढ़ा हुआ छात्र, जिसकी जेब में एक लाख रुपए थे. तीन साल में 300 करोड़ रुपए का मालिक हो गया. ऐसा जादूगर. मां-बेटे का ये मॉडल है. 2जी का सुना था, अब जीजाजी का भी सुन लें.''

भाजपा ने आरोप लगाया था कि रॉबर्ट वाड्रा को हरियाणा की कांग्रेस सरकार का सहयोग मिला. उन्हें और रिएल एस्टेट कंपनी डीएलएफ़ को हरियाणा सरकार ने गुड़गांव में फ़ायदा पहुंचाया.

भाजपा ने राजस्थान में उस समय की अशोक गहलोत सरकार पर भी वाड्रा को फ़ायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था. लेकिन वाड्रा इन आरोपों को राजनीतिक बताते रहे हैं.

नरेंद्र मोदी को सत्ता में आए डेढ़ साल हो चुके हैं. लेकिन मोदी समर्थक पूछ रहे हैं कि रॉबर्ट वाड्रा मामले को गरमाने वाली भाजपा की जांच की रफ़्तार धीमी क्यों है? वो इसे बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार से भी जोड़ रहे हैं.

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वाड्रा का नाम नो फ्रिस्किंग सूची से हटाने में 16 महीने लग जाने से वो अवाक हैं.

ट्विटर पर फ़ज़लू थानेदार लिखते हैं, ''मोदी जी देश इंतज़ार कर रहा है कि आप रॉबर्ट वाड्रा को उसकी काली कमाई के लिए जेल के दर्शन कब करवाएंगे. कब आएगा वो दिन.''

ख़ुद को भाजपा और नरेंद्र मोदी का फ़ैन बताने वाले कनिष्क शर्मा ट्विटर पर लिखते हैं, "पता नहीं भाजपा के कौन बड़े लोग शामिल हैं. वाड्रा क्यों हरियाणा में नवाब की तरह घूम रहे हैं?"

नरेंद्र मोदी के एक समर्थक प्रमोद चतुर्वेदी ट्विटर पर पूछते हैं, ''भाजपा इतनी निष्क्रिय क्यों है.''

सवाल-जवाब की वेबसाइट क्वोरा पर एक पाठक की राय

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सवाल जवाब की वेबसाइट कोरा पर एक व्यक्ति ने लिखा है, ''वाड्रा मामले को तीन चुनाव में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा चुका है– 2013 नवंबर राजस्थान विधानसभा चुनाव, 2014 लोकसभा चुनाव और 2014 हरियाणा विधानसभा चुनाव.''

लेखक के मुताबिक़ रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस की कमज़ोरी हैं. हर कांग्रेसी वाड्रा मामले में बचाव की मुद्रा में चला जाता है. अगर भाजपा उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करती है तो उसका उलटा असर हो सकता है.

तो क्या रॉबर्ट वाड्रा मुद्दा भी एक जुमला ही था, जिसे चुनाव के लिए बचाकर रखा गया है?

प्रकाशक और स्तंभकार मिनहाज़ मर्चेंट कहते हैं, ''नरेंद्र मोदी समर्थक चाहते थे कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच हो, कार्रवाई हो और दोषियों को सज़ा मिले. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.''

सोनिया और प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा.

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वो कहते हैं, ''वाड्रा मामले में कार्रवाई धीमी रही. हरियाणा में जांच समिति बनी है. अशोक खेमका के ख़िलाफ़ हुड्डा सरकार ने जो मामले दायर किए थे उन्हें मनोहर खट्टर सरकार ने वापस ले लिया है. लेकिन मोदी सरकार को मर्सिडीज़ की रफ़्तार से आगे बढ़ना चाहिए था पर वो मारुति 800 की रफ़्तार से आगे बढ़ रही है.''

मर्चेंट कहते हैं कि मोदी सरकार को गांधी परिवार के ख़िलाफ़ नेशनल हेराल्ड मामले में भी कड़ा रुख़ अपनाना चाहिए था.

'नेशनल हेराल्ड' अख़बार का प्रकाशन करने वाली कंपनी दी एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड की स्थापना 1938 में हुई थी. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस अख़बार को शुरू किया था. यह अख़बार 2008 में बंद हो गया था. यंग इंडिया नाम की एक नई कंपनी ने 2010 में इसका अधिग्रहण कर लिया था.

सुब्रमण्यम स्वामी

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भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि एसोसिएटेड जर्नल के अधिग्रहण के लिए कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ रुपए का क़र्ज़ यंग इंडिया को दिया था, जो कि ग़ैर-क़ानूनी है.

इस मामले को अदालत में ले जाने वाले स्वामी का आरोप है कि 'नेशनल हेराल्ड' के बंद होने के बाद कंपनी की संपत्ति पर ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से क़ब्ज़ा किया गया और यंग इंडिया नाम की एक कंपनी बनाई गई.

अपनी याचिका में स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, मोतीलाल वोरा और सुमन दुबे सहित छह लोगों पर आरोप लगाए हैं.

हरियाणा सरकार ने राबर्ट वाड्रा से जुड़े मामलों की जांच के लिए जस्टिस एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में आठ जून को एक जांच समिति का गठन किया था. समिति को छह महीने में अपनी जांच रिपोर्ट देनी थी. यह समिति अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है. जस्टिस ढींगरा कहते हैं कि सरकार जांच समिति का कार्यकाल छह महीने और बढ़ा सकती है, क्योंकि जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है.

ढींगरा समिति का काम उन परिस्थितियों की जांच करना है, जिसमें गुड़गांव में व्यावसायिक कॉलोनियों के विकास के लिए लाइसेंस दिया गया और क्या इस दौरान किसी क़ानून का उल्लंघन हुआ.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर.

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जस्टिस ढींगरा इस बात से इनकार करते हैं कि समिति बनाने का अर्थ मामले को ठंडे बस्ते में डालना है. उन्होंने इस बात का संकेत दिया कि रॉबर्ट वाड्रा को समिति के समक्ष बुलाया जाएगा, हालांकि उन्हें बुलाया कब जाएगा, वो यह नहीं बताते हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने पिछले कई महीनों में भाजपा के आरोपों का सार्वजनिक तौर पर या फिर मीडिया को जवाब नहीं दिया है. कांग्रेस पार्टी ये कहती आई है ये एक नागरिक का व्यक्तिगत मामला है.

भाजपा नेता अर्जुन राम मेघवाल विश्वास दिलाते हैं कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मामलों पर सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी लेकिन वो राजनीतिक बदला लेते हुए नहीं दिखना चाहती है.

आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी को मिली हार और फिर उसके बाद मिली जीत की परिस्थितियां नेताओं ने भुलाई नहीं हैं. लेकिन जिस तरह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कालाधन वापस लाने के वादे को चुनावी जुमला बताया था, उससे कई लोगों को संदेह है कि कहीं वाड्रा और अन्य के कथित भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की बात भी चुनावी जुमला न साबित हो.

(कल: रॉबर्ट वाड्रा पर क्या हैं मामले?)

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