झारखंड की गाय पहनेंगी पहचान पत्र

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, राँची से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
झारखंड की गायों को पहचान पत्र मिलने वाला है. आधार कार्ड की तरह इसमें 12 डिजिट का यूनीक आइडेंटिटी नंबर होगा.
इसे गायों को कान के पास पहनाया जाएगा. ऐसा केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय के निर्देश पर किया जा रहा है.
झारखंड स्टेट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी फ़ॉर कैटल एंड बफ़ैलो (जेएसआइएबी) को इसका नोडल एजेंसी बनाया गया है.
जेएसआइएबी के सीइओ डॉक्टर गोविंद प्रसाद ने बताया कि इस पहचान पत्र में गाय की तस्वीर, उम्र, रंग, मालिक आदि का ब्योरा दर्ज होगा.
सरकार मानती है कि ऐसा होने पर गायों की तस्करी पर रोक लगेगी. उनकी ब्रीड और दूध के उत्पादन का भी पता चलेगा.

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इस डेटा को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के डेटाबेस में डाला जाएगा. इसके लिए बोर्ड ने ही सॉफ्टवेयर बनाया है.
जेएसआइएबी के नोडल अधिकारी डॉ कृष्णकांत तिवारी ने बताया कि पहचान पत्र देने का काम दिसंबर से शरू किया जाएगा. पहले चरण में झारखंड के आठ ज़िलों में यह काम होगा.

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प्रादेशिक गौशाला संघ के अध्यक्ष आरके अग्रवाल का कहना है कि झारखंड में गायों की हालत बदतर है. आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद पशुपालक उसे आवारा छोड़ देते हैं. इससे वो अक्सर दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं.
झारखंड के करीब 42 लाख दुधारू जानवरों में 70 फ़ीसद गायें हैं.
उन्होंने बताया कि झारखंड प्रादेशिक गौशाला संघ ने इस कारण गायों के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की है.

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स्वामी रामदेव ने रांची में पिछले दिनों इसका उद्घाटन किया.
आरके अग्रवाल का कहना है कि गायों को समर्पित यह भारत की पहली एंबुलेंस सेवा है. इसके लिए टाटा-407 मॉडल के 10 मिनी ट्रकों को रीडिजाइन किया गया है.
उन्होंने बताया कि गौशालाओं में आवारा गायों को कई बार तो प्रशासन के लोग ही पहुंचा जाते हैं.
झारखंड एनिमल वेलफेयर सोसाइटी के एके झा ने बताया कि उनकी संस्था ने पिछले कुछ महीने में पांच हज़ार पशुओं का इलाज कराया है. इनमे से कुछ को बीमारी थी लेकिन अधिकतर दुर्घटना के शिकार थे.
झारखंड के कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने पिछले दिनों राज्य की 27 गौशालाओं को 50-50 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है. यह राशि तीन किस्तों में दी जाएगी.
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