बिन हाथों के वो बना सफल मैकेनिक

जसवंत, विकलांग मैकेनिक

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin

    • Author, रविंदर सिंह रॉबिन
    • पदनाम, चंडीगढ़ से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

लकवे के अटैक में जसवंत के दोनों हाथ और एक पैर उस समय बेकार हो गए थे जब वह उनका ठीक से इस्तेमाल करना शुरू कर ही रहे थे.

इसलिए उनकी ज़िंदगी कभी आसान नहीं रही. लेकिन 30 साल के जसवंत एक ही पैर से टीवी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दुरुस्त करते हैं.

अमृतसर के नौशेरा गांव के रहने वाले जसवंत खाना खाने के अलावा अपने रोज़मर्रा के काम भी एक पैर से ही करते हैं.

जसवंत अपने लकवाग्रस्त पांव के चलते चल तो नहीं पाते लेकिन अपने सही पैर से कूदते हैं. वह कहते हैं कि बचपन से ही वह इलेक्ट्रीशियन बनना चाहते थे.

'खुद पर गर्व'

जसवंत, विकलांग मैकेनिक

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin

जसवंत बताते हैं कि बीमारी के बाद माता-पिता की प्रेरणा और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से उन्होंने उपकरणों में गड़बड़ी ढूंढना और उन्हें ठीक करना सीखा.

वे कहते हैं, "मेरे उस्ताद ने बहुत धैर्य के साथ मुझे अपने पैर से पेचकस पकड़ना और मिलिमीटर, सोल्डरिंग, आयरन जैसे दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल करना सिखाया."

आंखों में चमक के साथ वह यह भी बताते हैं कि वह अपने पैर से लिखते भी हैं.

जसवंत, विकलांग मैकेनिक

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin

जसवंत कहते हैं, "जिन लोगों के साथ मेरे जैसी त्रासदी होती है वे अक्सर भीख मांगकर गुज़ारा करते हैं लेकिन मैंने अपनी शारीरिक कमज़ोरी को आड़े नहीं आने दिया और इसके बजाय समाज में अपने लिए इज़्ज़त बनाई."

जसवंत के पिता कश्मीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि जब जसवंत महज़ ढाई साल के थे तब उनके दोनों हाथ और एक पैर लकवे से बेकार हो गए थे.

उन्होंने कहा, "हम उसे कई डॉक्टरों के पास ले गए लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. आज हमने और जसवंत ने इस सबके साथ जीना सीख लिया है. जब जसवंत 15 साल के थे तब उन्होंने टीवी की मरम्मत का काम सीखा और जल्दी ही इसमें सिद्धहस्त हो गए."

जसवंत, विकलांग मैकेनिक

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin

उन्होंने कहा, "जसवंत ने कभी अपने लिए पैसे की मांग नहीं की और आज उन्हें ख़ुद पर गर्व है."

'गीतकार जसवंत'

दूसरों के लिए हिम्मत और संकल्प के प्रतीक बन चुके जसवंत कवि भी हैं. उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ कविताएं लिखी हैं.

वो कहते हैं, "कन्या भ्रूण हत्या हमारे समाज की सबसे बड़ी बुराई है और मैं इसके ख़िलाफ़ अलख जगाना चाहता हूँ."

उन्होंने कहा कि शारीरिक समस्या को देखते हुए ग्राहक उनसे सहानुभूति रखते हैं.

विकलांग मैकेनिक, जसवंत

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin

"जब पैसा देने की बात आती है तो वे ताना मारने लगते हैं कि हम तो तुम्हारी मदद करने के लिहाज से तुम्हारे पास आए थे. वरना दूसरे मैकेनिक भी तो हैं."

जसवंत कहते हैं कि सरकार को उनके जैसे लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए जो तमाम मुश्किलों के बावजूद जीवन में सफलता हासिल करते हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>