सीसीटीवी कैमरे पर दिखाई गई अदालत की सुनवाई

- Author, के.वी. लक्ष्मणा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, चेन्नई
ऐसा पहली बार हुआ जब बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के एक मामले की सुनवाई को सीसीटीवी के ज़रिए कोर्ट परिसर के अंदर स्क्रीन पर दिखाने का फ़ैसला किया.
मदुरै के दो वकीलों ए धर्माराजन और एके रामास्वामी पर अदालत की अवमानना का मामला तब बना जब उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश की आलोचना की थी.
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि दोपहिया वाहन पर सवारी करने वालों को हेलमेट लगाना ज़रूरी होगा.
हाईकोर्ट के इस फ़ैसले पर मदुरै के दो वकीलों ने गंभीर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट के जजों की मंशा पर सवाल उठाए थे.
उसके बाद ही मद्रास हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इन दो वकीलों के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला बनाया था.
बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दो वकीलों जिनके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला चल रहा और उनके वकीलों के अलावा किसी को कोर्टरूम में आने की इजाज़त नहीं दी थी.
कोर्ट में हंगामा
अदालत को इस बात का अंदेशा था कि वकील कार्रवाई के समय हंगामा कर सकते हैं जैसा कि 14 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में उन्होंने हंगामा कर दिया था.
14 सितंबर को कोर्टरूम में कुछ वकीलों ने हंगामा किया था और न्यायाधीशों को अपशब्द कहे थे.

इमेज स्रोत, AFP
वकीलों की इस हरकत की ख़बर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी और मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि तमिलनाडु में जज डर के माहौल में जी रहे हैं और बहुत मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं.
हंगामा करने वाले वकीलों के ख़िलाफ़ तमिल नाडु बार काउंसिल ने कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कि जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया आगे आई और उसने मदुरै के 15 वकीलों को निलंबित कर दिया.
लेकिन बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत बिल्कुल शांत थी और दो जजों ने दोपहर 2.30 बजे कार्रवाई शुरू की.
कोर्टरूम में तो कोई नहीं था लेकिन कोर्ट रूम से बाहर लगे बड़े टीवी स्क्रीन पर कार्रवाई को लाइव देखने के लिए कई वकील मौजूद थे.
माफ़ीनामा
हाईकोर्ट ने ये कहते हुए मंगलवार तक अगली सुनवाई स्थगित कर दी कि वो उन दो वकीलों के ख़िलाफ़ चल रहे अवमानना के मामले को वापस लेने पर विचार कर सकत है अगर वे बिना शर्त माफ़ी दें.
अदालत ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और कोर्ट की इज़्ज़त और जजों की प्रतिष्ठा का सवाल है.
अदालत ने कहा कि किसी को भी इसे भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
सुनवाई कर रहे दो जजों में से एक जस्टिस तमिलवानम ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच के हवाले किया जाना चाहिए.
जस्टिस सेल्वम ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले को जजों और वकीलों के बीच की लड़ाई दिखाने की कोशिश की जा रही है, हालांकि सच्चाई में ऐसा नहीं है.
उन्होंने कहा कि क़ानूनी पेशे से जुड़े हर व्यक्ति की यह ज़िम्मेदारी है कि वह इस पेशे के उच्च आदर्शों को बनाए रखने में अपना सहयोग दे.
जस्टिस सेल्वम ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ वकील ग़ैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हैं''.
(बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य से हुई बातचीत पर आधारित)
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>रें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












