गुजरात: पटेलों के खिलाफ़ अन्य जातियों की गोलबंदी

इमेज स्रोत, AFP
- Author, दर्शन देसाई
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
गुजरात एक बार फिर सामाजिक उथल पुथल के दौर से गुजर रहा है.
सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहे पटेलों के आंदोलन के बाद पिछड़ी जातियां, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियाँ एक बार फिर गोलबंद हो रही हैं. विडंबना यह है कि 1985 में पटेलों ने ही अन्य पिछड़ी जातियों को आरक्षण दिए जाने का ज़बरदस्त विरोध किया था.
नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए दलितों, अनूसूचित जातियों, पिछड़ी जातियों, अन्य पिछड़ी जातियों और आदिवासियों को हिंदुत्व के नाम पर एकजुट किया था. अब वे जातियां ही पटेल आंदोलन की वजह से एक बार फिर अपना अलग गुट बना रही हैं.

इमेज स्रोत, AFP
भारतीय जनता पार्टी ने ही 1980 के देशक में जातियों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की थी. उसे लगा था कि आरक्षण का विरोध कर वह कांग्रेस पार्टी की जातीय समीकरण को चुनौती नहीं दे पाएगी.
उस समय कांग्रेस ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमानों को एकजुट कर अपने पाले में कर लिया था. ये 'खाम' कहे जाने लगे थे.
गुजरात में कुल मातदाताओं का 70 फ़ीसदी हिस्सा इन्हीं वर्गों से आता है.
साल 1985 का आरक्षण विरोधी आंदोलन हिंदु-मुसलमान दंगों में बदल दिया गया था और हिंदूओं में क्षत्रिय और हरिजन दोनों थे. यह वह समय था जब विश्व हिंदु परिषद और बजरंग दल ने अन्य पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जातियों के लोगों को अपनी ओर लाना शुरू कर दिया था.

सामाजिक विश्लेषक अच्युत याग्निक कहते हैं, "इससे दलितों और दूसरे लोगों में सशक्तिकरण की भावना आई. लिहाज़ा, जातीय अंतरविरोधों के बावजूद ये लोग हिंदुत्व के झंडे तले आ गए."
वे कहते हैं, "उस समय पिछड़ी जातियों पर होने वाले ऊंची जातियों के हमलों के प्रति मुसलमान उदासीन ज़रूर रहते थे. लेकिन हिंसक हमलों के वक़्त वे पिछड़ों के साथ मज़बूती से खड़े रहते थे. यही वजह है कि अस्सी के दशक में दलित-मुस्लिम भाई-भाई का नारा बुलंद हुआ."
यही वो वक़्त था जब बीजेपी ने दोनों समूहों को बांटने की कामयाब चाल चली.
इसी समय बीजेपी ने राष्ट्रीय राजनीति में ऊपर उठने का बीज गुजरात में बोया. 1984 में बीजेपी के देशभर में सिर्फ़ दो ही सांसद थे और उनमें से एक एकके पटेल उत्तर गुजरात के मेहसाणा से थे.

कुछ सालों में ही कांग्रेस को 182 में से 149 सीटें दिलाने वाला 'खाम' फ़ार्मूला बिखर गया और 1990 के बाद पार्टी कभी गुजरात में सत्ता में नहीं आई. गुजरात में अनुसूचित जातियों के लिए 13 और अनुसूचित जनजातियों के लिए 26 सीटें आरक्षित हैं.
गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी मानते हैं कि पटेल आंदोलन से पार्टी को उम्मीद की एक किरण दिख रही है. हालांकि कांग्रेस अब सिर्फ़ 'खाम' समुदायों के लिए ही नहीं बल्कि जातीय भेदभाव के बग़ैर सभी ग़रीबों और पिछड़ों की आवाज़ उठाने वाले दल के रूप में दिखना चाहती है.
भरत सिंह सोलंकी के पिता माधवराव सोलंकी चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और 'खाम' फ़ार्मूले को उन्होंने ही मज़बूत किया था.

इमेज स्रोत, ANKUR JAIN
बीजेपी से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक पटेलों का आरक्षण आंदोलन नरेंद्र मोदी के शासनकाल में गुजरात सरकार की नीतियों में आए बदलाव का नतीजा है.
भाजपा के एक पूर्व मंत्री कहते हैं, " पटेल मूल रूप से किसान और खेतिहर थे जिन्होंने बाद में छोटी और मध्यम ओद्योगिक इकाइयां शुरू की. लेकिन अब ऐसी हज़ारों इकाइयां बंद हो गई हैं, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी बढ़ी है. दूसरी ओर, सरकार छोटे उद्योगपतियों की क़ीमत पर बड़े औद्योगिक घरानों को तरज़ीह दे रही है."

इमेज स्रोत, PTI
उनके मुताबिक युवा पटेलों का आंदोलन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोज़गारी से पैदा हुई कुंठा का नतीजा है.
अच्युत याग्निक इससे सहमत हैं.
इससे सहमत होते हुए अच्यूत याग्निक कहते हैं कि पटेल समुदाय में आंजणा और कोली पटेल जैसे छोटे समुदाय भी हैं जो ओबीसी के अंतरगत आते हैं और उन्हें आरणक्ष के फ़ायदे मिलते हैं.
याग्निक कहते हैं, "पाटीदार, जो मूल पटेल हैं और अब ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत अपने लिए आरक्षण मंग रहे हैं उन्हें लगता है कि उनकी अनदेखी हुई है. यही वजह है कि ताज़ा आंदोलन उत्तर गुजरात से शुरू हुआ जहां पटेलों की बड़ी आबादी आंजणा पटेलों के पड़ोस में रहती है."
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












