राजस्थान में मांस-मछली की बिक्री पर रोक

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    • Author, नारायण बारेठ
    • पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

राजस्थान में जैन और हिन्दू धार्मिक त्योहारों पर तीन दिन तक मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने पर विवाद उठ खड़ा हो गया है.

नागरिक अधिकार संगठनों ने इसे सविंधान के विरुद्ध बताया है.

अल्पसंख्यक समुदाय ने भी सरकार के इस क़दम का विरोध किया है.

राज्य में स्थानीय निकाय निदेशालय ने 17-18 सितंबर को दो दिन तक जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व और संवत्सरी पर मांस-मछली की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया है.

निदेशालय ने 27 सितंबर को हिन्दू पर्व अनन्त चतुर्दशी के मौक़े पर भी मांस-मछली की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है.

विरोध

लेकिन नागरिक अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टी ने इसे लोगों की धार्मिक आज़ादी पर प्रहार बताया है.

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पीयूसीएल की कविता श्रीवास्तव के अनुसार यह सविंधान के अनुच्छेद 14 में वर्णित समानता के अधिकार के विरुद्ध है.

श्रीवास्तव ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, ''सरकार कैसे तय कर सकती है कि लोग क्या खाएं. ये सरकार का काम नहीं है कि लोग शाकाहारी हों या माँसाहारी हों.

उन्होंने कहा कि सरकार का यह क़दम सविंधान के अनुच्छेद 25 में दी गई धार्मिक आज़ादी का भी उल्लंघन है.

मुसलमानों के एक संगठन जमायते इस्लामी के डॉ मोहम्मद इक़बाल हैरत के साथ पूछते हैं, ''लोगों की ख़ुराक और खानपान क्या हो, यह सरकार कब से तय करने लगी है? हमें अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि बीजेपी सरकार एक ख़ास एजेंडे के तहत ये सब कर रही है.''

नागरिक अधिकार संगठनों के मुताबिक़ मांसाहार का एक आर्थिक पक्ष है और यह अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला भी है. सरकार के क़दम से एक बड़े वर्ग को आर्थिक नुक़सान भी होगा.

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