'ऐशले मैडिसन हैकिंग' भारत से हुई होती तो..

ऐशले मैडिसन

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    • Author, पवन दुग्गल
    • पदनाम, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट 'ऐशले मैडिसन' का डेटाबेस पिछले दिनों हैक हो गया.

हैकर्स इस वेबसाइट की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने में ना केवल कामयाब हुए बल्कि बड़े पैमाने पर डेटा भी वे चुरा पाए.

बाद में हैकर्स और साइबर अपराधियों ने इंटरनेट पर चुराए गए डेटा को सार्वजनिक कर दिया जिससे साइट से जुड़े लोगों में खलबली मच गई थी.

लीक की गई जानकारी में ऐसे सरकारी अफसरों के नाम भी शामिल हैं जिन्होंने सरकारी कंप्यूटर पर इस वेबसाइट को देखा था.

नतीजतन ख़ुदकुशी के कुछ मामले भी सामने आए.

अगर भारत से हैकिंग का यह मामला हुआ होता तो क़ानून के तहत यूज़र के क्या अधिकार होते और वेबसाइट की क्या स्थिति होती?

वेबसाइट पर बाध्यता

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भारत में कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम, कंप्यूटर नेटवर्क, कंप्यूटर रिसोर्सेज, और कम्युनिकेशन उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की सुरक्षा सूचना तकनीक क़ानून 2000 के तहत आती है.

भारतीय साइबर क़ानून के तहत 'ऐशले मैडिसन' जैसे वेबसाइट मध्यवर्ती श्रेणी में आते हैं.

ऐसी वेबसाइट थर्ड पार्टी के संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा की रक्षा करने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को बनाए रखने के लिए बाध्य है.

मौजूदा हैकिंग का मामला अगर भारत में हुआ होता तो वेबसाइट को दो तरह की क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था.

क़ानून के तहत कंपनी को लोगों को होने वाले नुकसान के लिए मुआवज़ा देना पड़ सकता था, और साथ ही साथ कंपनी के प्रबंधन पर आपराधिक मामला चल सकता था.

जिसके परिणामस्वरूप जेल और जुर्माना हो सकता था.

तो फिर, ऑनलाइन डेटिंग साइट पर जाने से पहले यूजर्स को किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है?

वेबसाइट पर विज़िट का रिकॉर्ड

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यूजर्स को यह जानना जरूरी है कि इंटरनेट पर कुछ भी सुरक्षित नहीं है. जो कुछ भी कल सुरक्षित था वो आज सुरक्षित नहीं है. और जो आज सुरक्षित है वो कल नहीं रहेगा.

यूजर्स कौन सी वेबसाइट इस्तेमाल कर रहे हैं, इसको लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत हैं.

क्योंकि किसी भी वेबसाइट पर उनकी गतिविधि को उस वेबसाइट के द्वारा रिकॉर्ड कर लिया जाता है और अगर ये वेबसाइट हैक हो जाती है तो यूजर्स की पूरी जानकारी हैकर्स के पास जा सकती है और वो सार्वजनिक हो सकती है.

यूजर्स को वेबसाइट के इस्तेमाल से पहले उस पर मौजूद नियम और शर्तें, गोपनीयता नीति और दूसरे क़ानूनी दस्तावेज ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए, ताकि वे कई पेचीदा मसलों पर वेबसाइट की क़ानूनी स्थिति को समझ सकें.

अगर एक आदमी ऑनलाइन डेटिंग साइट पर जाता है तो इस बात का जोखिम बना रहता है कि वेबसाइट के हैक होने की स्थिति में आने वाले समय में उसकी पहचान जगज़ाहिर हो सकती है.

हमेशा यह बेहतर होता है कि इन डेटिंग वेबसाइटों को ऑफ़िस कंप्यूटर पर कभी नहीं खोला जाए.

क्योंकि ये कंपनी नेटवर्क के दायरे में आ जाता है और यूजर्स को क़ानूनी कार्रवाई के अलावा बेवजह दफ्तर में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

यूजर की प्रतिष्ठा को भी इससे धक्का लग सकता है.

क़ानूनी उपाय

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ऐसे मामले में जब आप हैकिंग के शिकार होते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए कि आप वेबसाइट पर उल्लेखित नियम और शर्तों के दायरे में रहकर ही क़ानूनी मदद ले सकते हैं.

इसके अलावा आप कुछ कड़े कदम भी उठा सकते हैं. मसलन भारतीय साइबर क़ानून के तहत आप वेबसाइट को अपना डेटा सुरक्षित नहीं रख पाने के कारण मुआवज़े के लिए वेबसाइट पर मुकदमा दायर कर सकते हैं.

हैकिंग के मामले में आपराधिक मामला दायर हो सकता है और आप वेबसाइट के उच्च प्रबंधन के ख़िलाफ़ सूचना तकनीक क़ानून, 2000 के कई धाराओं और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक मामला दायर कर सकते हैं.

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