पढ़ाई में कमज़ोर, पटेलों के मज़ूबत नेता

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद से
एक साधारण युवा जब असाधारण काम करे तो सब का ध्यान उस पर ज़रूर जाता है.
गुजरात के 22 वर्षीय नए नेता हार्दिक पटेल एक साधारण मध्यम वर्ग के व्यपारिक परिवार से आते हैं.
ऐसे परिवारों की पूरी ज़िन्दगी गुमनामी में गुज़र जाती है.
हार्दिक पटेल भी हाल तक गुमनामी का जीवन बिता रहे थे. उनके परिवार या पड़ोसी उनके सियासी उदय पर हैरान हैं लेकिन ख़ुश भी.
इन दिनों गुजरात में पटेल समुदाय के लिए नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल सुर्ख़ियों में हैं.
बड़ी मुश्किल से बीए पास
वो पटेल समुदाय के हीरो के तौर पर देखे जा रहे हैं.
बीकॉम में 50 प्रतिशत से भी कम अंकों के साथ मुश्किल से डिग्री हासिल करके वो घर पर बैठे थे. नौकरी नहीं थी.
भविष्य उज्जवल नज़र नहीं आ रहा था.
उनके पड़ोसियों और परिवार के अनुसार हार्दिक पटेल के लोकप्रिय होने या नेता बनने के कोई भी आसार नहीं नज़र आते थे
इसके बावजूद वो आज पटेल समुदाय के मसीहा से बन गए हैं.
'मोदी भी गुमनाम थे'

इमेज स्रोत, EPA
परिवार हों या पड़ोसी सभी ये तर्क देते हैं कि नरेंद्र मोदी भी राज्य के मुख्यमंत्री बनने से पहले गुमनाम थे.
लेकिन मोदी भारतीय जनता पार्टी के महासचिव रह चुके थे. हार्दिक पटेल ने तो सियासत के पहले पायदान पर कदम भी नहीं रखा है मगर शोहरत उनके कदम चूम रही है आज गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बाद कोई पहचाना चेहरा है तो वो हार्दिक पटेल का है.
लेकिन हार्दिक पटेल को लोग अब भी अच्छी तरह से नहीं जानते. हार्दिक पटेल हैं कौन? यही जानने के लिए मैं शुक्रवार को उनके गाँव गया.
अहमदाबाद से 60 किलोमीटर दूर विरामगाँव असल में घनी आबादी वाली एक बड़ी तहसील है.
विरामगाँव के जिस इलाक़े में उनका पक्का घर है वहां चारों तरफ ख़ामोशी छाई थी.
उनकी रैलियों में जितनी ऊंची नारों की गूँज उठती है उतनी गहरी यहाँ की शांति महसूस होती है
कम नंबर लानेवाले छात्र

घर के अंदर हार्दिक पटेल की माँ, बहन और कुछ दूसरे रिश्तेदार उत्तेजित नज़र आ रहे थे.
माँ कहती हैं पढ़ाई में हार्दिक कमज़ोर थे जिसके कारण उनके भविष्य के बारे में चिंता होती थी.
"वो बचपन से शरारती था. पढ़ाई के वक़्त केवल क्रिकेट खेलता था. हमें उसकी चिंता होती थी कि आगे जाकर वो क्या करेगा."
हार्दिक की छोटी बहन मोनिका पटेल को इस बात पर गर्व है कि स्कूल और कॉलेज में कम नंबर लाने वाला उनका भाई आज पूरे पटेल समुदाय का लीडर बन गया है.
"मैं जब उन्हें टीवी पर देखती हूं तो मुझे और हमारे माता-पिता को बहुत ख़ुशी होती है. गर्व महसूस होता है"
हार्दिक पटेल पढ़ाई मे कमज़ोर ज़रूर थे लेकिन क्रिकेट में बहुत तेज़.
इलाक़े के जिस सरकारी स्कूल केवी शाह विनय मंदिर में उन्होंने पढ़ाई की उसके प्रिंसिपल अल्केश के. दवे के अनुसार हार्दिक पटेल क्रिकेट में स्कूल के सलामी बल्लेबाज़ थे.
उनका कहना था कि हार्दिक की पर्सनालिटी में लीडरशिप की झलक नज़र आती थी.
स्कूल में मौजूद कई शिक्षकों ने दावा किया कि उनका विद्यार्थी शुरू से ही लीडर था.
प्रिंसिपल साहब बात करते करते उत्साह में बोलते हैं कि उन्हें अपने शागिर्द पर नाज़ है.
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