खाड़ी देश एनआरआई के लिए जानलेवा

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खाड़ी के देशों में लाखों भारतीय नौकरी पेशा करते हुए रह रहे हैं, लेकिन उन्हें कई ख़तरों का सामना करना पड़ता है.
अमरीका में रहने वाले एक एनआरआई के मुक़ाबले सऊदी अरब या कुवैत में रहने वाले एक एनआरआई पर मौत का ख़तरा दस गुना अधिक होता है.
गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल के तहत आने वाले तेल के छह धनी देशों सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, ओमान, क़तर और बहरीन में 70 लाख से भी अधिक भारतीय रहते हैं.
यह संख्या पूरी दुनिया में रह रहे एनआरआई की 60 फ़ीसदी है.
हाल के दिनों में बड़ी संख्या में <link type="page"><caption> भारतीयों मज़दूरों की मौत</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=MbupEgJjH2w" platform="highweb"/></link> के कारण क़तर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.

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अमरीका और ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय ज्यादातर वित्तीय या तकनीकी संस्थानों में काम करते हैं. जबकि खाड़ी के देशों में वे खतरनाक क्षेत्र में नौकरी करते हैं जैसे निर्माण का क्षेत्र. अमरीका और ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों के पास बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हैं. इसकी वजह केवल उनकी बेहतर आय नहीं बल्कि उन देशों में मौजूद बेहतर सेवाएं भी हैं.
आंकड़े ये भी बताते हैं कि क़तर में भारतीयों की मौत की दर सऊदी अरब से आधी है. अगर ये मान ले कि क़तर में रहने वाले भारतीय वैसी ही नौकरियाँ करते हैं, जैसे सऊदी, कुवैत और ओमान में रहने वाले भारतीय तो ये बात साफ है कि काम करने के बेहतर तौर तरीकों और अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं से कई जानें बचाई जा सकती हैं.
2022 विश्व कप फ़ुटबॉल का आयोजन क़तर में होने वाला है और इसीलिए पश्चिमी देशों की निगाह उस पर टिकी हैं शायद ये वजह हो सकती है कि वहां काम करने की स्थिति पड़ोसी देशों से अच्छी है.
<bold>(<link type="page"><caption> इंडियास्पेंड </caption><url href="http://www.indiaspendhindi.com/category/special-reports" platform="highweb"/></link>की रिसर्च पर आधारित)</bold>
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