राष्ट्रपति के भाषण की 10 प्रमुख बातें

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

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भारत के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है.

उन्होंने संसद के गतिरोध के अलावा आतंकवाद के मुद्दे की भी चर्चा की.

आइए नज़र डालते हैं राष्ट्रपति के भाषण की 10 प्रमुख बातों पर.

1. संसद में विभिन्न मुद्दों पर बहस हो, पर यह राजनीतिक अखाड़े में तब्दील न हो जाए.

2. यदि लोकतंत्र की संस्थाएं दबाव में हैं तो जनता और राजनीतिक दल इस पर गंभीर चिंतन करें, उपाय ढूढें.

3. कुछ तत्व सदियों पुरानी धर्मनिरपेक्षता को बर्बाद करना चाहते हैं, उन्हें किसी सूरत में कामयाब नहीं होने देना है.

'चरमपंथ बर्दाश्त नहीं'

प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति

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4.चरमपंथ किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, इसका कोई संप्रदाय नहीं होता, इसकी विचारधारा नहीं होती.

5. पड़ोसी देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी ज़मीन का इस्तेमाल भारत विरोधी तत्व न कर पाएं.

6. पिछले साल देश में आर्थिक विकास की दर बढ़ी, पर इसका लाभ सबसे ग़रीब आदमी तक पंहुचना चाहिए.

'आत्मनिरीक्षण की ज़रूरत'

प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रपति

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7. छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े दूसरे लोगों को शिक्षा व्यवस्था पर आत्मनिरीक्षण करने की ज़रूरत है.

8. पड़ोसी देशों के साथ सद्भभाव और उनकी समृद्धि बढ़ाने के लिए काम किया जाना चाहिए.

9. पानी की कमी और अधिकता दोनों के प्रबंधन का दीर्घकालीन समाधान ढूंढे जाने की ज़रूरत है.

10. हमारे देश में लोकतंत्र की जड़ें गहरी हैं, पर इसकी पत्तियां मुरझाने लगी हैं. इसके नवीकरण का समय है.

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