कलामः अख़बार बांटने से राष्ट्रपति भवन तक

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- Author, पल्लव बागला
- पदनाम, विज्ञान मामलों के जानकार
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने एयरोनॉटिकल इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.
वो हिन्दुस्तान की दो बड़ी एजेंसियों डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन (डीआरडीओ) और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन (इसरो) के प्रमुख रहे थे.
दोनों एजेंसियों में उन्होंने बहुत उम्दा काम किया.
हिन्दुस्तान के पहले रॉकेट एसएलवी-3 को बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. पोलर सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल (पीएसएलवी) बनाने में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी.
हिन्दुस्तान के पहले मिसाइल पृथ्वी मिसाइल और फिर उसके बाद अग्नि मिसाइल को बनाने में भी डॉक्टर कलाम का अहम योगदान रहा है.
परमाणु कार्यक्रम में भूमिका

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हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि भारत ने 1998 में जो परमाणु परीक्षण किया था उसमें भी डॉ कलाम की विशिष्ट भूमिका थी. उस समय वो डीआरडीओ के प्रमुख थे.
हिन्दुस्तान को दुनिया की बड़ी ताक़त बनाने के कारण देश के इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा.
दुनिया के गिने-चुने राष्ट्रप्रमुख ही ऐसे होंगे जो उनकी जितनी उच्च शिक्षा प्राप्त होंगे.
वैश्विक राजनीति में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी. वो बहुत बड़े मानवतावादी थे.
वो मृत्युदंड देने के पूरी तरह ख़िलाफ़ थे, ख़ासकर न्यायाल द्वारा.
उनका जैसा दूसरा मुश्किल

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जब मैंने भारत के चंद्रयान मिशन पर किताब लिखी तो वो बहुत ख़ुश हुए थे. उन्होंने मुझसे कहा कि तुमने बहुत अच्छी किताब लिखी है, लोगों के काम आएगी.
वो अपने क़िस्म के एक ही थे. उनके जैसा कोई दूसरा होना मुश्किल है. उनका बच्चों से जो जुड़ाव था उसे देखकर आश्चर्य होता था.
इतने बड़े वैज्ञानिक और राष्ट्रप्रमुख बनने के बाद भी वो बच्चों से बहुत गहरा जुड़ाव महसूस करते थे. वो बच्चों के संग बच्चों की तरह बात करते थे.
डॉ कलाम जन्म से मुस्लिम थे लेकिन उनका जन्म हिन्दुओं के एक प्रमुख शहर रामेश्वरम में हुआ था. भारतीय संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव था.
उनकी किताब 'अग्नि की उड़ान' नौजवानों के लिए प्रेरणादायक है. वो अपने भाषणों से भी युवाओं में जोश भर देते थे.
बड़ी सोच

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उन्होंने अपने स्कूली दिनों में अख़बार बांटने का काम किया था.
अख़बार बेचने से शुरू करके देश को वैज्ञानिक शक्ति बनाना फिर भारत का राष्ट्रपति बनना एक विलक्षण उपलब्धि है.
ऐसा वही कर सकता है जिसकी सोच बहुत बड़ी हो और विज्ञान में गहरी रुचि हो. इन दोनों चीज़ों में उनकी तुलना मुश्किल है.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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