सीए याक़ूब मेमन जेल में हुए डबल एमए

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- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याक़ूब मेमन को 1993 में मुंबई हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में फांसी दी जानी है.
इन धमाकों में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा घायल हुए थे.
अदालत के अनुसार याक़ूब ने इन धमाकों की साज़िश रचने और अंजाम देने में मदद की थी.
उनका पूरा नाम याक़ूब अब्दुल रज़्ज़ाक़ मेमन है और वो अपने परिवार के सबसे पढ़े-लिखे सदस्य हैं. एक बार मेमन समाज ने उन्हें सर्वोत्तम चार्टर्ड अकाउंटेंट का ख़िताब दिया था.
मुंबई के भायखला इलाक़े के रहनेवाले अब्दुल रज़्ज़ाक़ मेमन की तीसरी संतान, 53 वर्षीय याक़ूब की सारी पढ़ाई अंग्रेज़ी मीडियम से हुई.
चार्टर्ड अकाउंटेंसी का फ़र्म

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बीकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने वर्ष 1990 में चार्टर्ड अकाउंटेंट का इम्तेहान पास किया.
इसके एक साल बाद उन्होंने अपने बचपन के दोस्त चेतन मेहता के साथ 'मेहता एंड मेमन एसोसिएट्स' नाम से चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म शुरू की.
कुछ मतभेदों की वजह से ये फ़र्म एक साल में ही बंद हो गई.
इसके बाद याक़ूब ने 'ए आर एंड संस' नाम से अपनी ख़ुद की चार्टर्ड अकाउंटेंसी फ़र्म शुरू की. इस फ़र्म का नाम उन्होंने अपने पिता की याद में रखा था.
चार्टर्ड अकाउंटेंसी की सफलता के बाद उन्होंने आयात–निर्यात के कारोबार में क़िस्मत आज़माने के लिए तिजारत इंटरनेशनल नाम से कंपनी की स्थापना की और मीट और मीट-प्रोडक्ट्स के निर्यात का कारोबार शुरू किया.
कारोबार में सफलता

आयात-निर्यात के कारोबार में याक़ूब को काफ़ी सफलता मिली जिसकी बदौलत उन्होंने मुंबई उपनगर माहीम में माहीम दरगाह के पास अल हुसैनी इमारत में अपने छह भाइयों के लिए घर ख़रीदे.
उनके छोटे भाई टाइगर मेमन 1993 मुंबई धमाकों में अभियुक्त हैं. टाइगर अभी तक गिरफ़्तार नहीं हुए हैं.
कहा जाता है कि टाइगर मेमन अंडरवर्ल्ड सरग़ना दाऊद इब्राहिम के क़रीबी हैं. दाऊद की भी मुंबई बम धमाकों में तलाश है.
याक़ूब मेमन ने नागपुर सेंट्रल जेल में रहते हुए इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी तथा पोलिटिकल साइंस में एमए किया.
याक़ूब मेमन को 1993 मुंबई बम धमाकों के संबंध में 1994 में गिरफ़्तार किया गया था.
गिरफ़्तारी

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सीबीआई के अनुसार याक़ूब मेमन को नेपाल के काठमांडू से गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन उनकी पत्नी ने मीडिया से कहा कि याक़ूब ने आत्मसमर्पण किया था.
अगर याक़ूब को फांसी हो जाती है, तो इस मामले में पहली बार किसी को फांसी दी जाएगी.
अदालती दस्तावेज़ों के मुताबिक़ इस मामले के प्रमुख सूत्रधार टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहिम और अनीस इब्राहिम थे.
इन तीनों ने दिसंबर 1992 तथा जनवरी 1993 में कुछ ख़ास लोगों को दुबई बुलाकर इन धमाकों की योजना बनाई थी.
अदालत के अनुसार याक़ूब ने इस योजना को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई.
पैसे और हथियार

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अदालत के अनुसार याक़ूब ने धमाकों के लिए अपने दोस्तों के ज़रिए 21.90 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई थी. साथ ही उन्होंने हथियार और अन्य विस्फोटक सामग्री का बंटवारा भी किया था.
मुंबई के विशेष टाडा अदालत ने उन्हें साल 2007 में फांसी की सज़ा सुनाई. उसके बाद याक़ूब ने मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
भारत के राष्ट्रपति ने उनकी क्षमादान याचिका को ख़ारिज कर दिया है. फ़िलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल के पास उनकी क्षमा याचिका लंबित है.
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