याक़ूब मेमन को दी जाएगी फाँसी

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1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी क़रार दिए गए याक़ूब मेमन की क्यूरेटिव पीटिशन को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.
साल 2007 में टाडा कोर्ट ने 53 वर्षीय याक़ूब मेमन को धमाकों की साजिश में शामिल होने का दोषी पाते हुए फांसी की सज़ा दी थी.
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मार्च 1993 में मुंबई में एक के बाद एक हुए 12 धमाके हुए थे. इन धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग ज़ख्मी हुए थे.
अदालत ने मुंबई बम धमाकों के लिए दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन को दोषी माना था.
मेमन को छोड़कर बाक़ी 10 दोषियों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया गया था.
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याक़ूब टाइगर के भाई हैं. मंगलवार को याक़ूब के क्यूरेटिव पीटिशन पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की पीठ ने याक़ूब की याचिका ख़ारिज कर दी.
इसके बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी दया याचिका अस्वीकार कर दी.
इस साल अप्रैल में जस्टिस एआर दवे ने मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ याक़ूब के रीव्यू पीटिशन को ख़ारिज कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ याक़ूब की अपील पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने मार्च, 2013 में उनकी मौत की सज़ा बरक़रार रखी थी.
अगर मेमन को फांसी होती है तो मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामलों में ये पहली फांसी होगी.
परिवार के चार सदस्य

इस मामले से जुड़ी एक सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत की व्यावसायिक राजधानी को निशाना बनाने की साजिश दाऊद इब्राहिम ने टाइगर मेमन के साथ मिलकर रची थी.
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए जिन लोगों को इन धमाकों के लिए दोषी पाया था उनमें टाइगर मेमन परिवार के चार सदस्य याक़ूब मेमन, यूसुफ मेमन, इसा मेमन और रुबीना मेमन शामिल हैं.
इन सभी को धमाकों की साजिश में शामिल होने और चरमपंथ को बढ़ावा देने के लिए दोषी क़रार दिया गया.
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