बाबू बजरंगी की अस्थायी ज़मानत बढ़ी

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- Author, अंकुर जैन
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को 2002 के नरोदा पाटिया दंगों के दोषी बाबूभाई पटेल उर्फ़ बाबू बजरंगी की अस्थायी ज़मानत 10 दिन के लिए बढ़ा दी है.
उम्रक़ैद की सज़ा पाए बाबू बजरंगी की ज़मानत अदालत ने इस शर्त पर बढ़ाई कि वह फिर ज़मानत बढ़ाने की मांग नहीं करेंगे.
बाबू बजरंगी तीन महीने से अस्थायी ज़मानत पर हैं. ये अस्थायी ज़मानत 24 जुलाई को समाप्त हो रही है.
उन्हें यह राहत आंख के इलाज के लिए दी गई थी.
'लंबित याचिका'
बजरंगी ने ज़मानत की अवधि एक महीने तक बढ़ाने की मांग करते हुए अर्ज़ी दी थी. उनका कहना था कि उन्हें मूत्र मार्ग का संक्रमण (यूटीआई) हो गया है और वह सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं.

बजरंगी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश लखानी ने कहा, "मेरे मुवक्किल की दोनों आंखें ख़राब हो चुकी हैं. यूटीआई बढ़ने से उनकी तकलीफ़ बढ़ गई है और इसलिए इलाज के लिए एक महीने का समय दिया जाना चाहिए".
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयार विशेष जांच दल (एसआईटी) के वकील प्रशांत देसाई ने ज़मानत बढ़ाने का विरोध किया, एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है.
उन्होंने कहा कि बजरंगी और अन्य के दोषी सिद्ध होने के ख़िलाफ़ याचिका पहले ही बेंच के समक्ष विचार के लिए उपस्थित है, इसलिए इस मामले पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए.
साल 2002 के नरोदा पाटिया दंगों में अल्पसंख्यक समुदाय के 97 लोग मारे गए थे. इस मामले में एक विशेष जांच अदालत ने बजरंगी के अलावा 30 को दोषी ठहराया था. इनमें गुजरात की पूर्व मंत्री मायाबेन कोडनानी भी शामिल थीं.
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