एफ़आईआर से हमें डराने की कोशिश: तीस्ता

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
सीबीआई ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के ख़िलाफ़ विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम यानी एफ़सीआरए के उल्लंघन को लेकर मुंबई में एक एफ़आईआर दर्ज की है.
एफ़आईआर में तीस्ता के अलावा उनके पति जावेद आनंद, उनके एनजीओ के एक निदेशक समेत कुछ अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है.
सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने बीबीसी को बताया है कि तीस्ता और उनके पति के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट और सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस ने बिना गृह मंत्रालय की अनुमति लिए एक विदेशी संस्था से 2.9 लाख डॉलर बतौर दान स्वीकार किए, जिससे विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन का मामला बनता है.
जाफ़री मामले की सुनवाई 27 से
यह मामला तब दर्ज किया गया है, जब अदालत में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान एहसान जाफ़री मामले में की सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाली है.
तीस्ता इस मामले में उनकी विधवा ज़किया जाफ़री की मदद कर रही हैं. तीस्ता का आरोप है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है.

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तीस्ता का कहना है, "गुजरात पुलिस की कोशिश रही है कि हमारा काम बंद हो जाए, हमारी संस्था बंद हो जाए. पिछले दो साल से हमें परेशान किया जा रहा है. फ़रवरी में तो गुजरात पुलिस की पोल ही खुल गयी थी. वो तो सुप्रीम कोर्ट ने हमें परेशान होने से बचा लिया.
पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वो तीस्ता के एनजीओ को मिले विदेशी अनुदान की जांच करे.
सीबीआई के प्रवक्ता का कहना है कि तीस्ता, उनके पति जावेद आनंद और उनकी एनजीओ में एक अन्य निदेशक पेशिमान ग़ुलाम मुहम्मद के ख़िलाफ़ विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के अलावा आईपीसी धारा 120 (बी) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
उनका कहना था कि एफ़सीआरए के तहत किसी भी पंजीकृत अख़बार में काम करने वाले विदेशी चंदा नहीं ले सकते हैं.
डराने की कोशिश

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हलाकि बीबीसी से बात करते हुए तीस्ता ने आरोप लगाया है कि उनके ख़िलाफ़ यह सबकुछ इस लिए हो रहा है ताकि दंगों के आरोपियों को राहत मिल सके.
वो कहती हैं, "हमें डराने की कोशिश की जा रही है ताकि दंगों के ख़िलाफ़ अदालत में कोई बोलने वाला नहीं हो और उन्हें ज़मानत मिल जाए."
बहरहाल बुधवार को मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने औपचारिक रूप से अपनी जाँच शुरू कर दी है.
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