'बलात्कारी से समझौता, गरिमा के ख़िलाफ़'

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बलात्कार के मामलों में अदालत से बाहर किसी तरह का सुलह-समझौता महिलाओं की गरिमा के ख़िलाफ़ है.
पिछले हफ़्ते मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने बलात्कार के एक मामले में ज़मानत मंज़ूर करते हुए कहा था कि वो पीड़िता के साथ कोई समझौता कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बुधवार को मद्रास हाई कोर्ट के सुझाव को 'एक बड़ी भूल' बताया.
अदालत का हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह टिप्पणी मध्यप्रदेश में बलात्कार के एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान की.

मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश डी देवीदास ने कहा था कि इसी तरह के एक मामले में जिसमें उन्होंने हस्तक्षेप किया था, उसका सुखद अंत यह हुआ था कि बलात्कार का अभियुक्त पीड़िता से शादी के लिए 'राजी' हो गया था.
उस मामले में, न्यायाधीश ने कहा कि बलात्कार पीड़िता घटना के बाद गर्भवती हो गई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया, वह किसी की पत्नी नहीं है. वह बिन ब्याही माँ है.
अदालत ने कहा कि इस मामले में सबसे अच्छा विकल्प यह होगा कि पीड़िता उस व्यक्ति के साथ एक समझौता कर ले जिसने उसके साथ बलात्कार किया.
बाद में पीड़ित महिला ने संवाददाताओं से कहा था कि वह कोई समझौता नहीं चाहती है.
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