अलमारी सरकार की, चाबी आपके हाथ

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

आप अगर सरकारी दफ़्तरों के चक्कर काट कर थक चुके हैं. कोर्ट-कचहरी में धक्के खाकर मायूस हो गए हैं तो अब आपकी इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद बंधी है.

बुधवार से आप इस सरकारी वेबसाइट (https://digitallocker.gov.in/) पर जाकर एक नए डिजिलॉकर के मालिक बन सकते हैं.

इस लॉकर में आप अपने सारे दस्तावेज़ सेव कर सकते हैं. अपनी निजी जानकारी के दस्तावेज़ और फ़ोटो वहां रख सकते हैं.

अगर किसी सरकारी दफ़्तर या बाबू को आपकी कोई फ़ाइल चाहिए तो आप उसे उनके साथ ऑनलाइन शेयर कर सकते हैं.

मुसीबतों से छुटकरा

लैपटॉप पर काम करते बच्चे.

इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं, अगर आप किसी नए जिम में जाना शुरू करते हैं, तो वहां सामान रखने के लिए आपको एक लॉकर दिया जाता है. इसकी चाबी आपके पास होती है. लेकिन ज़ाहिर है लॉकर जिम की किसी दीवार से लगा होता है.

डिजिलॉकर आपकी दुनिया होगी. आप अफसरों की रिश्वतबाज़ी, उनकी सुस्ती और दूसरी मुसीबतों से बच सकते हैं.

हाँ इसके इस्तेमाल के लिए आपका आधार कार्ड नंबर चाहिए.

इसका मतलब यह है कि आपकी निजी जानकारी और फ़ाइलों की चाबी आपके पास होगी.

डिजिलॉकर उस मुहिम का एक अहम भाग है, जिसे एनडीए सरकार डिजिटल इंडिया कहती है.

हफ़्ते भर का समारोह

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इसका उद्घाटन बुधवार शाम चार बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं. डिजिटल इंडिया से संबंधित समारोह एक सप्ताह तक चलेंगे.

सूचना प्रोद्यौगिकी (आईटी) मंत्री रवि शंकर प्रसाद के मुताबिक़ डिजिटल इंडिया का उद्देश्य हर नागरिक को सरकारी महकमों से जोड़ना है.

डिजिटल इंडिया एक पेपर-मुक्त दुनिया होगी, जहाँ सारे काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे.

उनके मुताबिक़ सरकारी दफ्तरों की क्षमता बढ़ेगी, लोगों का काम आसान होगा, पैसा और समय बचेगा.

लेकिन डिजिटल इंडिया के आलोचक कहते हैं कि इससे देश में डिजिटल विभाजन बढ़ने का खतरा है.

परियोजना पर संदेह

उदाहरण के तौर पर डिजिलॉकर का इस्तेमाल वही नागरिक कर सकेंगे जिन्हें कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध होगी.

इसे चलाने के लिए बिजली की ज़रूरत होगी.

इसके अलावा जिसके पास मोबाइल फोन होगा, वही इसका इस्तेमाल कर सकेगा क्योंकि वन टाइम पासवर्ड (OTP) आपके मोबाइल पर ही आएगा.

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ पिछले साल दिसंबर तक भारत की 130 करोड़ आबादी में से 17.3 करोड़ लोग मोबाइल फोन के मालिक थे. यह संख्या इस साल जून तक 21.3 करोड़ होने की उम्मीद थी.

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भारत में पिछले साल तक साक्षरता दर 74 फीसद से थोड़ा ऊपर थी. इसका मतलब साफ है कि अगले कुछ सालों तक आबादी का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल इंडिया से नहीं जुड़ सकेगा. बिजली की कमी की वजह से गाँवों के करोड़ों लोग इससे नहीं जुड़ पाएंगे.

बदलेगा समाज

सरकार इस मुहिम को हर गाँव तक ले जाना चाहती है. इसके तहत शुरू में कुछ गाँवों में से एक में सरकारी कंप्यूटर हब होंगे, जहाँ जाकर ग्रामीण उस कंप्यूटर पर लॉगइन कर सकते हैं.

कंप्यूटर पर काम करती महिलाए.
इमेज कैप्शन, सरकार को इस परियोजना से पांच करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.

डिजिटल इंडिया देश और समाज को बदलने की क्षमता रखता है. इसका बजट एक लाख करोड़ रुपए का है.

रवि शंकर प्रसाद का दावा है कि इस योजना को पूरी तरह लागू करने के बाद पांच करोड़ लोगों को रोज़गार मिलेगा.

डिजिटल इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी वादों में से एक है. ये उनके दो बड़े प्रोजेक्ट यानी मेक इन इंडिया और स्किल्ड इंडिया से जुड़ा है.

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