पत्रकार बेहाल, पत्रकारिता शर्मसार

पत्रकारिता, भारत

इमेज स्रोत, THINKSTOCK

    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शाहजहांपुर से लौटकर

शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की संदिग्ध मौत के बाद अब मध्यप्रदेश के एक पत्रकार संदीप कोठारी की कथित रूप से हत्या की ख़बर आ रही है.

जगेंद्र सिंह की 8 जून को हुई मौत से पहले आख़िरी बयान में उन्होंने पांच पुलिस वाले और राज्य के एक मंत्री के ख़िलाफ़ हमले का आरोप लगाया लेकिन अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है जबकि कोठारी की हत्या के बाद तीन लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

छोटे शहरों में पत्रकारों पर बढ़ते हुए हमलों पर उनके अंदर असुरक्षा का माहौल है. मैं शाहजहांपुर में कुछ स्थानीय पत्रकारों से मिला और उनके काम काज के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की.

'खंडहरनुमा' दफ़्तर

शाहजहांपुर प्रेस दफ्तर

अंधेरे से एक कमरे में पतलून और बनियान पहने एक आदमी कंप्यूटर पर काम कर रहा है. तेज़ पंखे के बावजूद कमरा काफ़ी गर्म है. दो और लोग वहां अपने कामों में मशगूल हैं. कमरे में रखे कैमरे, ट्राइपॉड और टेप्स को देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि ये किसी मीडिया वाले का दफ़्तर है.

ये 'खंडहरनुमा' दफ़्तर यहां के पत्रकारों का सामूहिक ऑफ़िस है. शाहजहांपुर में सक्रिय लगभग सभी रजिस्टर्ड पत्रकारों का ये एक अकेला ऑफ़िस है. उनका ये एक तरह से अड्डा भी है.

शिव कुमार एक बड़े चैनल के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. वे कहते हैं, "एक तरफ ख़बरों का स्थानीयकरण हो रहा है, दूसरी तरफ महंगाई बढ़ रही है. हमें एक स्टोरी के जितने पैसे मिलते हैं वो बहुत कम है. यही वजह है कि हम ग्रुप में काम करते हैं ताकि हमारा ख़र्च कम हो."

जगेंद्र सिंह

इमेज स्रोत, shahjahanpur samachar

यहां अधिकतर पत्रकार फ्रीलान्सर हैं यानी किसी मीडिया संस्था से जुड़े बगैर काम करते हैं. किसी को तनख़्वाह नहीं मिलती बल्कि जितनी स्टोरी करो उतने पैसे मिलते हैं.

हमें यहां के पत्रकारों ने बताया कि अख़बार की एक स्टोरी के केवल 150 रुपए मिलते हैं जबकि एक टीवी स्टोरी के 700 से 800 रुपए मिलते हैं.

यानी अगर अख़बार के एक पत्रकार की किसी एक महीने में 10 कहानियां प्रकाशित हुईं तो उस महीने में उसकी कमाई केवल 1500 रुपए हुई. दूसरे शब्दों में उसकी एक मज़दूर से भी कम कमाई है.

'पत्रकारिता का अपराधीकरण'

शाहजहांपुर प्रेस दफ़्तर

स्थानीय पत्रकार कहते हैं कि कहानी के लिए दूर दूर तक धूप, गर्मी और बरसात में अपने पेट्रोल के ख़र्च पर जाना पड़ता है.

वरिष्ठ पत्रकार सरदार शर्मा 'स्वतंत्र भारत' अख़बार के ब्यूरो चीफ़ हैं. उनके अनुसार कम वेतन से बड़ी समस्या 'पत्रकारिता का अपराधीकरण' है.

उनके अनुसार कई फ़र्ज़ी पत्रकार इस शहर में घूम रहे हैं. शाहजहांपुर कोई बड़ा शहर नहीं है लेकिन इसके बावजूद यहां 150 पत्रकार सक्रिय हैं. शर्मा केवल 30 को पहचानते हैं.

अपराधीकरण के मुख्य कारण पर टिप्पणी करते हुए मुहम्मद इरफ़ान कहते हैं, "आज जब लोग ये देखते हैं कि एक अंगूठा छाप पत्रकार को अधिकारी सम्मान दे रहा है तो वो भी पत्रकार बनना चाहते हैं".

समस्याएं

इरफ़ान पत्रकारों के एक राष्ट्रीय संघ के कार्यकारी सदस्य हैं. वो कहते हैं कि उनकी यूनियन डिस्ट्रिक्ट स्तर पर पत्रकारिता की समस्याओं में सुधार लाने की तरफ कोई क़दम नहीं उठा सकी है.

साथ ही साथ वे ये भी कहते हैं कि पत्रकारों के कई संघ हैं जो अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं. इस लिए फर्ज़ी पत्रकारों के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठाया जा सका है.

सहारा न्यूज़ चैनल के प्रेम शंकर गंगवार कहते हैं कि अगर स्थानीय पत्रकारों को नियमित नौकरियां मिलने लगीं तो 70 प्रतिशत समस्याएं दूर हो जाएंगी.

शिव कुमार इससे सहमत ज़रूर हैं लेकिन उनके अनुसार पहले ये जानना ज़रूरी है कि पत्रकार कितने तरीके के हैं.

वे कहते हैं, "यहां तीन तरीके के पत्रकार हैं. पहली श्रेणी में वो पत्रकार हैं जिनके लिए पत्रकारिता एक नशा है. दूसरे में वो लोग हैं जो अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए इस पेशे में आए हैं और तीसरी श्रेणी उन पत्रकारों की है जिनका फुल टाइम पेशा ही पत्रकारिता है."

दुर्भाग्य से तीसरी श्रेणी के पत्रकार सब से अहम होने के बावजूद भी सब से कम संख्या में हैं और ये हाल लगभग सभी छोटे शहरों का है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>