पहेली बनी शाहजहाँपुर के पत्रकार की मौत

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शाहजहांपुर
मुग़लों का बसाया उत्तर प्रदेश का शहर शाहजहांपुर.
यहाँ क़ानून व्यवस्था गड़बड़ लगती है. फ़र्ज़ी मुक़दमे आम हैं.
शाहजहांपुर में एक जून को एक स्वतंत्र पत्रकार की मौत का मामला भी एक पहेली बन कर रह गया है
पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या की गई या उन्होंने आत्म हत्या की?
इस पर जितने मुंह उतनी बातें. इस कांड में दो केस दर्ज हैं.
गवाह पर केस

एक आत्महत्या का मामला जिसमें वो ख़ुद अभियुक्त हैं, दूसरा उनकी कथित हत्या के मामले में पांच पुलिस वाले और एक मंत्री अभियुक्त हैं.
ये पुलिस वाले निलंबित हो चुके हैं लेकिन अब तक कोई गिरफ़्तार नहीं हुआ है.
इस कांड की अकेली चश्मदीद गवाह हैं जगेंद्र की एक महिला दोस्त, जिन तक पहुंच केवल पुलिस की है.
हमने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन उनका पता किसी को नहीं.
पुलिस ने इस महिला पर भी जगेंद्र की आत्महत्या में कथित रूप से मदद करने के आरोप में मुक़दमा दायर किया है.
एक जून को स्थानीय पुलिस जगेंद्र को गिरफ़्तार करने उनके घर पहुंची थी.
मंत्री पर आरोप

जगेंद्र ने 8 जून को अपनी मौत से पहले अपने बयान में कहा उन्हें पुलिस ने मारा पीटा और उनको आग लगा दी.
"मुझे पुलिस वालों ने मारा पीटा और आग लगा दी. मुझे गिरफ्तार कर लेते लेकिन मारा क्यों, तेल क्यों छिड़का "
जगेंद्र ने मरने से पहले राज्य के एक मंत्री राममूर्ति वर्मा का नाम भी लिया था.
कहा जाता है कि जगेंद्र ने फ़ेसबुक पर मंत्री के ख़िलाफ़ एक मुहिम छेड़ रखी थी और उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे.
सियासी दुश्मनी?

कुछ स्थानीय पत्रकारों के अनुसार ऐसा वो एक पूर्व विधायक देवेंदर सिंह के इशारे पर कर रहे थे जिनसे जगेंद्र कथित रूप से पैसे लेकर वर्मा के ख़िलाफ़ ख़बरें छापते थे.
देवेंदर सिंह ने कहा कि वो ख़बरें छापते थे लेकिन दूसरे लोग भी छापते थे.
उन्होंने कहा, "जगेंद्र ने मुझसे पैसे कभी नहीं मांगे. मैंने एक बार उन्हें एक विज्ञापन के लिए एक हज़ार रुपये ज़रूर दिए थे."
देवेंदर सिंह और राममूर्ति वर्मा एक समय दोस्त थे लेकिन अब सियासी प्रतिद्वंद्वी हैं.
वर्मा किसी से बात नहीं कर रहे हैं लेकिन देवेंदर सिंह के अनुसार उनकी दुश्मनी का इस कांड से कोई लेना-देना नहीं है
जांच पर सवाल

शाहजहांपुर के एसपी बबलू कुमार कहते हैं, "हम निष्पक्ष रूप से सारे मामले की जांच कर रहे हैं."
लेकिन जगेंद्र के परिवार वाले पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं हैं. उनके बेटे राहुल सिंह कहते हैं कि इसकी जांच सीबीआई करे.
अपनी मांग को मनवाने के लिए जगेंद्र का परिवार धरने पर है.
पुलिस जांच की स्वतंत्रता पर कई लोगों को शक है.
'सीबीआई करे जांच'

सुरेश कुमार खन्ना पिछले 30 साल से स्थानीय विधायक हैं और भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता भी हैं.
उनके अनुसार इस कांड में एक मंत्री और कई पुलिस वालों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज है.
वो कहते हैं, "ऐसे में बेहतर तो यही होता कि राज्य सरकार इस केस को सीबीआई के हवाले कर दे".
जगेंद्र के बेटे राहुल कहते हैं, "मेरे पापा की मौत के मुक़दमे में पुलिस वाले ही आरोपी हैं और पुलिस वाले ही इसकी जांच कर रहे हैं. सबूत मिटाए जा रहे हैं. इसकी जांच सीबीआई करे".
बदल दिया बयान?

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जगेंद्र की महिला मित्र ने मंत्री समेत कई पुलिस वालों पर बलात्कार का आरोप लगाया था लेकिन पुलिस ने अब तक एफ़आईआर दर्ज नहीं की है.
मरने से पहले जगेंद्र इस सिलसिले में उनकी मदद कर रहे थे. एक जून वाले कांड में पुलिस ने इस महिला को जगेंद्र की कथित आत्महत्या में आरोपी बनाया है.
उन पर जगेंद्र की आत्महत्या में मदद का आरोप है. इस महिला ने जगेंद्र के मरने से पहले तक जो बयान दिए उनमें कहा है कि पुलिस ने जगेंद्र की हत्या की है.
लेकिन एक मजिस्ट्रेट को दिए ताज़ा बयान में कथित रूप से उन्होंने अपना बयान बदल दिया है.
पुलिस इस महिला से किसी को मिलने नहीं दे रही है. मैं इस महिला के घर गया लेकिन दरवाज़े पर ताला लगा था.
वहां पुलिस का पहरा था. स्थानीय पत्रकारों ने भी उनका पता लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस के अलावा किसी को नहीं मालूम कि वो महिला कहाँ है.
ऐसे में जगेंद्र के परिवार वालों को शक है कि पुलिस ने महिला पर दबाव डाल कर उनसे उनका पुराना बयान बदलवा दिया है
'अदालत से आस'

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राज्य सरकार ने जांच सीबीआई के हवाले करने से इनकार कर दिया है लेकिन एक मानव अधिकार संस्था ने अदालत से अपील की है कि इस मामले की जांच सीबीआई करे.
इस पर अगली सुनवाई 25 जून को होगी.
इस बीच जगेंद्र की पत्नी कहती हैं कि उनके दोनों बच्चे उनके पति की निडर पत्रकारिता को आगे बढ़ाएंगे. वे अभी नाबालिग़ हैं लेकिन बड़े होने पर वे यह काम करेंगे. वो ख़ुद जगेंद्र पर गर्व करती हैं.
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