पलामू मुठभेड़ में झारखंड सरकार को नोटिस

झारखंड मुठभेड़

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पलामू मुठभेड़ मामले में झारखंड राज्य के मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजा है.

राज्य सरकार को चार हफ़्ते के भीतर इस नोटिस का जवाब देना होगा.

नोटिस की कॉपी राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को मेल से भेजी गयी है.

मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नारायण राय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा,''पलामू मुठभेड़ में कुछ शिकायतें मिली थीं. हमने चीफ़ सेक्रेटरी और डीजीपी को कल नोटिस भेजा. उन्हें 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है.''

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वहीं पुलिस प्रवक्ता और एडिशनल डीजीपी (ऑपरेशन) एस एन प्रधान ने कहा, ''हम किसी भी तरह के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं. अगर एनएचआरसी को इस एनकाउंटर के डिटेल्स चाहिए, तो हम निर्धारित समय सीमा मे इसे भेज देंगे."

मुठभेड़ पर सवाल

9 जून की रात सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) की कोबरा बटालियन और पलामू पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में कथित तौर पर 12 माओवादियों का मार गिराया गया था.

इस कथित मुठभेड़ के अगले दिन ही इस पर सवाल खड़े होने लगे थे. माओवादियों ने निर्दोष लोगों के मारे जाने का आरोप लगाया था.

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करीब छह घंटे चली मुठभेड़ में एक भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था. मुठभेड़ का नेतृत्व पलामू के आईजी ए नटराजन और एसपी एम के पटेल ने किया था.

इस मुठभेड़ में एक पारा टीचर और पंद्रह साल का एक किशोर भी मारा गया था. इनके परिजनों का आरोप था कि इनका किसी भी नक्सल संगठन से संबंध नहीं है.

पुलिस ने इस मुठभेड़ मे मारे गए सात लोगों की पहचान की थी. बाकी के पांच लोगों की पहचान की जानकारी माओवादियों के एक संगठन ने मीडिया को दी थी.

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