फसल बर्बाद हुई तो बच्चे गिरवी रख दिए

बाल शोषण

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    • Author, राजेश चतुर्वेदी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओले की मार से पीड़ित एक किसान ने अपने दो बेटों टीसू और बैजू को एक गड़रिये के पास गिरवी रख दिया.

मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में जब सरकरी अधिकारियों को 13 वर्षीय टीसू और 11 वर्षीय बैजू को गिरवी रखे जाने की ख़बर लगी तो वो हैरान रह गए.

तफ़्तीश के बाद पता लगा कि तीन बच्चे और गिरवी हैं.

खरगोन ज़िले के मोहनपुरा गांव के लाल सिंह भिलाला ने बीबीसी को बताया, "मिर्च की फसल के पहले 60 हज़ार का कर्ज़ लिया था. पहले मिर्च बाद में गेंहू की फसल भी बर्बाद हो गई."

भिलाला के अनुसार, "तीन एकड़ असिंचित भूमि पर ट्यूबवेल लगाने के लिए पैसे कम पड़ गए, इसलिए दोनों को गड़रिए भुरू के पास एक साल के लिए गिरवी रख दिया."

बच्चे कैसे बचे

गिरवी रखे गए बच्चे

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उन्होंने बताया कि भुरू ने इसके बदले जो 16 हजार रूपए दिए, उससे मोटर आई.

लाल सिंह और मणिबाई के दोनों बेटों के साथ इसी गांव मोहनपुरा के एक रिश्तेदार का बेटा भी नौ माह पूर्व भुरू के पास गिरवी रखा था. उस बच्चे के भुरू ने 12 हज़ार रुपये दिए थे.

भुरू का डेरा बानापुरा हरदा में था. बच्चे उसकी भेड़ें चराते थे. कई बार खाना नहीं दिया जाता था. मारपीट की जाती थी.

लिहाजा लाल सिंह के दोनों बच्चे भागकर बानापुर से 47 किमी दूर जिला मुख्यालय हरदा पहुंच गए.

वहां लोगों ने उन्हें चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया.

गड़रिया

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इमेज कैप्शन, खरगोन पुलिस ने इसे मानव तस्करी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दे दिए.

चाइल्ड लाइन ने पुलिस को ख़बर की. हरदा पुलिस ने डेरे की तलाशी ली तो एक बच्चा और मिला.

भुरू गड़रिये ने पूछताछ में एक और गड़रिए का नाम बताया और कहा कि उसके क़ब्ज़े में भी दो बच्चे हैं. तलाशी लेने पर दोनों बच्चे भी बरामद हो गए.

खरगोन कलेक्टर नीरज दुबे ने कहा कि, "जब मैं दोनों बच्चों बैजू और टीसू के गांव पहुंचा तो उस दिन भी उनका बाप नशे में धुत था."

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