मोदी का एक साल, किसानों पर क्या बीती?

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

बेमौसम बारिश और किसानों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोदी सरकार की एक साल की उपलब्धियों की कसौटी खेती-किसानी भी होगी.

लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने किसानों को लेकर कई बड़े वादे किए थे.

कृषि मामलों के विशेषज्ञ हरवीर सिंह ने चुनाव के पहले किए गए वादों का आकलन करते हुए बताया कि मोदी की सरकार पिछले एक साल में अपने वादों पर कितनी खरी उतर पाई है?

मोदी के वादे

भारतीय किसान

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किसानों की आमदनी बढ़ाने का वादा - भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव में कृषि आयोग के अध्यक्ष रह चुके प्रोफ़ेसर स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करने का वादा भी किया था, जिसमें किसानों को लागत के पचास फ़ीसदी मुनाफ़े की सिफारिश की गई थी.

मगर इस दिशा में पिछले एक साल के दौरान सरकार की तरफ़ से कोई पहल नहीं हुई.

अलबत्ता रबी और खरीफ की फसलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य में सिर्फ तीन से चार फ़ीसदी का ही इज़ाफ़ा किया गया.

'एग्रीकल्चर प्रोडक्ट सेकंड एडवांस्ड एस्टीमेट' के अनुसार, खाद्यान्न उत्पादन में पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

पिछले वित्तीय वर्ष में अगर देश की विकास दर 7.4 रही तो कृषि क्षेत्र में ये सिर्फ 1.1 रही.

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हर खेत को पानी: इस नारे को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री सिचाई योजना बनाई गई.

वर्ष 2015-16 के बजट में प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का लक्ष्य सभी खेतों लिए सिंचाई उपलब्ध कराना और कृषि जल का सदुपयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया.

मगर भारत में 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा भूमि कृषि योग्य है. ऐसे में इस योजना के तहत किए गए प्रावधान नाकाफी हैं.

आधारभूत संरचना में सुधार: पिछले एक साल में इस दिशा में कुछ भी नहीं किया गया और आज भी किसानों के लिए ऐसी समग्र कृषि नीति का अभाव बरक़रार है, जिसमें किसान को उसके उत्पाद के लिए बेहतर पैसे मिलें.

किसान के लिए अपने उत्पादों को बाज़ार में बेचने के बेहतर साधनों की कमी है और साथ ही किसानों को सस्ते आयात से समर्थन दिए जाने में भी इच्छा शक्ति की कमी नज़र आ रही है.

कृषि उत्पादन के लिए दी जाने वाली छूट भी दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम ही है.

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गुजरात मॉडल - इस मॉडल के तहत कृषि के लिए बिजली के अलग फ़ीडर का प्रावधान करने का वादा नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी अभियान के दौरान किया था.

उनका कहना था जिस तरह गुजरात में खेती के लिए अलग से विद्युत आपूर्ति का प्रावधान किया गया है, उसी तरह पूरे देश में किसानों को बिजली के लिए शहरों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

मगर एक साल में इस ओर कोई क़दम नहीं बढ़ाया गया है.

उपलब्धियां

नरेंद्र मोदी

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मुआवज़े में बढ़ोतरी - मौसम की मार झेल रहे किसानों की फसलों को हुए नुकसान का मुआवज़ा बढ़ाया गया.

अरसे से चली आ रही मुआवज़े की दर में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई.

फसलों के नुकसान के आंकलन में बदलाव - पहले फसलों को पचास प्रतिशत तक के नुकसान पर ही मुआवज़े की प्रक्रिया लागू होती थी, जिसे घटाकर 33 प्रतिशत कर दिया गया है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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