नन्ही और सपनाः 'साथ जिएंगे, साथ मरेंगे'

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- Author, रोहित घोष
- पदनाम, कानपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
शादी-शुदा जोड़े साथ जीने और साथ मरने की कसमें खाते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से ज़िले के एक छोटे से कस्बे में हाल ही में 'शादी के बंधन' में बंधे एक जोड़े ने भी साथ जीने और साथ मरने की कसम खाई है.
फ़र्क इतना है कि इस जोड़े में 'पति' भी महिला है. 25 वर्षीय नन्ही कश्यप अब अपने आप को पति की भूमिका में देखती हैं.
19 साल की सपना गोस्वामी अपने आप को पत्नी मानती हैं. दोनों ही एक बच्चा गोद लेकर अपने परिवार को बढ़ाने की सोच रहीं हैं.
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मामला कासगंज ज़िले का है.
लेकिन कासगंज में नन्ही के परिवार ने उन्हें और उनकी 'पत्नी' को अपना लिया है और घर में दोनों को पति-पत्नी के तरह रहने की आज़ादी दे दी है.
सोरों कासगंज का एक छोटा सा क़स्बा है. नन्ही सोरों के रामसिंहपुरा गाँव में रहती हैं और सपना पड़ोस के रामपुर नगरिया गाँव में की रहने वाली हैं.
नन्ही अपने घर बाहर एक छोटी सी परचून की दूकान चलाती हैं. सपना अक्सर नन्ही की दुकान में सामान ख़रीदने जाया करती थीं.
समलैंगिक शादी!

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वहीं से दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई और उन दोनों ने आपस में शादी करने का फ़ैसला कर लिया.
नन्ही के अनुसार वो किसी पुरुष से शादी करने के पक्ष में नहीं थीं. उन्होंने कहा, "सपना भी किसी आदमी से शादी करने को तैयार नहीं थीं."
अप्रैल, 14 को दोनों कासगंज के एक नोटरी अधिवक्ता के पास पहुंचे और एक स्टाम्प पेपर पर लिख दिया कि दोनों शादी कर रहे हैं.
सपना ने अपना उपनाम गोस्वामी से बदल कर कश्यप कर लिया. नन्ही और सपना को नहीं पता कि समलैंगिक विवाह को क़ानून मान्यता देता है या नहीं.
गलत सा सही!

सपना ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमे पता नहीं कि हमने गलत किया है या सही किया. पर अब साथ जिएंगे और साथ मरेंगे."
<link type="page"><caption> (पढ़ें- समलैंगिक जोड़े को 'मान्यता')</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/07/110729_gurgaon_lesbians_marriage_sy" platform="highweb"/></link>
थोड़ा रुककर फिर कहती है, "जेल भी जाएंगे तो एक साथ ही जाएंगे." नन्ही और सपना के पिता का देहांत कुछ साल पहले हो चुका है.
जहाँ नन्ही के पिता दुकान चलाते थे, सपना के पिता पंडित थे. न ही नन्ही के पास और न ही सपना के पास कोई डिग्री है.
नन्ही कहती है, "हमारा नाम स्कूल की रजिस्टर में लिखवाया गया था पर पढ़ाई नहीं की."
मामला थाने में

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सपना के परिवार को शादी से आपत्ति थी. सो मामला सोरों थाने तक पहुंचा.
<link type="page"><caption> (पढ़ें- परिवारवालों का इंतजार करते दो शव)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/03/110303_lesbians_suicide_sz" platform="highweb"/></link>
कासगंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अशोक सिंह ने कहा, "नन्ही और सपना की शादी क़ानूनी है या नहीं, यह अदालत तय करेगा. यह समाज के ऊपर है कि वह शादी को स्वीकार करे या नहीं."
वह कहते हैं, "पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि किसी की जान को कोई ख़तरा न हो. अगर कोई पक्ष यह कहे कि उसकी जान को ख़तरा है तो हम तुरंत कार्रवाई करेंगे."
सपना अब नन्ही के घर पर रह रही हैं. वह कहती हैं, "नन्ही के घरवालों को हमारी शादी से कोई आपत्ति नहीं है. हम दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहें हैं."
आपसी सहमति

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नन्ही ने कहा, "हो सकता है कि समाज के कुछ लोग हम दोनों की शादी को मान्यता न दें पर उससे हमें कोई मतलब नहीं है."
कानपुर के एक वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंदर सिंह गौड़ ने कहा, "किसी भी लिंग के दो व्यक्ति आपसी सहमति से एक साथ रह सकते हैं."
गौड़ बताते हैं, "लेकिन अगर वो शादी-शुदा होने का दावा भी करते हैं तो वह क़ानूनन मान्य नहीं होगा और किसी भी साथी को वो हक़ हासिल नहीं होंगे जो एक शादी-शुदा स्त्री या पुरुष को मिलते हैं."
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