कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर श्रीनगर में विरोध

श्रीनगर में प्रदर्शन

इमेज स्रोत, HAZIQ QADRI

    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पुलिस और अलगाववादियों के बीच झड़पों से यातायात और कारोबार पर असर पड़ा है.

प्रदर्शनकारी उस प्रशासनिक आदेश को वापस लेने की मांग कर रहे थे, जिसमें कश्मीरी पंडितों के लिए अलग आवासीय परिसर बनाने की बात कही गई है.

1990 के दशक में कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और हत्याओं की कई घटनाओं के बाद कश्मीरी पंडितों ने वहाँ से पलायन कर दिया था.

श्रीनगर में प्रदर्शन

हालाँकि मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कश्मीरी पंडितों के लिए अलग आवासीय कॉलोनियां बनाने से इनकार किया है. इसके बावजूद अलगाववादी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की इस योजना को चुनौती देते हुए सड़कों पर निकलकर प्रदर्शन किया.

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इस बीच, पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा ने फिर दोहराया है कि वह निर्वासित पंडितों के लिए अलग आवासीय परिसर चाहती है.

लाल चौक पर जुलूस निकालने का प्रयास कर रहे पूर्व चरमपंथी कमांडर यासीन मलिक को उनके कई समर्थकों समेत को गिरफ़्तार कर लिया गया.

अपनी गिरफ़्तारी से पहले मलिक ने कहा, “हम 1990 में घाटी छोड़कर गए लोगों की वापसी के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनका स्वागत तभी होगा जब वे अपने घरों में लौंटे, न कि आरक्षित शिविरों में. इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ेगा.”

शनिवार को बंद का आह्वान

सैयद अली गिलानी, असिया अंदराबी और पाकिस्तान स्थित चरमपंथी नेता सलाहुद्दीन ने भी इस क़दम का विरोध किया है.

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मलिक और गिलानी समेत कई नेताओं ने इसके विरोध में शनिवार को घाटी बंद का आह्वान किया है.

यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के प्रवक्ता सैयद सदाक़त हुसैन ने हिज़बुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सलाहुद्दीन के एक उच्च स्तरीय बैठक में दिए बयान का हवाला देते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के लिए अलग आवासीय परिसर बनाने के पीछे गहरा षडयंत्र है और भारत के इस क़दम के ख़िलाफ़ वे मिलकर लडेंगे.

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1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौर में भी लगभग 10 हज़ार कश्मीरी हिंदुओं ने वहीं रुके रहने का फ़ैसला किया था.

यासीन मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यहां अब भी पंडित हैं. मुस्लिमों के इलाक़े में उनकी दुकानें हैं. वे हमारे साथ कारोबार करते हैं, हमारे साथ रहते हैं और हम एक-दूसरे के सुख-दुख बांटते हैं. अगर दूसरे पंडित लौटते हैं तो उन्हें भी इसी मॉडल के तहत रहना होगा.”

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गिलानी ने भी एक बयान में कहा, “हम उनकी वापसी चाहते हैं और अपने समाज में मिलाना चाहते हैं और ऐसे रहना चाहते हैं, जैसे पहले रहा करते थे.”

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