हिंदू महासभा ने कराई 60 जोड़ों की शादी

- Author, अमल चौधरी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अखिल भारत हिन्दू महासभा ने घोषणा की थी कि वैलेंटाइन डे के अवसर पर उन्हें जो भी अविवाहित जोड़ा सड़कों पर दिखेगा वे उनकी शादी कराएंगे.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) सहित कई कॉलेजों के छात्रों ने शनिवार को इसका विरोध किया.
इस दौरान करीब 300 छात्र-छात्राएं दूल्हा-दुल्हन के परिवेश में और ढोल नगाड़ों के साथ महासभा के ऑफिस के बाहर करीब 12 बजे पहुंचे. छात्रों ने विरोध के रूप में एक-दूसरे से नकली शादी भी रचाई.

लेकिन प्रदर्शन के कुछ ही देर बाद पुलिस वहां पहुंची और सभी को संसद मार्ग स्थित थाने ले गई. हालांकि सभी को शाम पांच बजे तक छोड़ दिया गया.
छात्रों का कहना था कि कोई भी संगठन उनकी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छीन सकता और राजनीतिक पार्टियां का इस तरह के फरमान जारी करना सरासर गलत है.
प्रदर्शन करने पहुंचे डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के सचिव ईशान आनंद ने बताया, "हम इस तरह के किसी भी संगठन की बात क्यों मानें. कोई हमें कैसे बता सकता कि हमें किससे शादी करनी है और किससे नहीं."
ईशान ने बताया, "हम वहां शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे इसके बावजूद पुलिस हमें उठाकर ले गई. कोई भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था."
वहीं जेएनयू की छात्रा नेहा ने बताया, "जब पुलिस आई तो उनके साथ महिला पुलिस बल नहीं था. हमें पुरुष पुलिसकर्मियों ने वहां से जबरदस्ती हटाया. हमें पांच घंटे तक थाना परिसर में रखा गया और एक गिलास पानी तक नहीं दिया गया."

तो दूसरी तरफ जेएनयू के छात्र नेता लेनिन ने कहा, "यह राजनीतिक पार्टियां जिस तरह की बयानबाजी करती हैं वह सरासर गलत है. हम सभी बालिग हैं और जानते हैं कि हमें किससे शादी करनी है. कोई संगठन हमारी शादी के लिए हमारा साथी व दिन तय नहीं कर सकता."
हालांकि इस पूरे मुद्दे पर महासभा ने कहा कि उन्होंने किसी भी जोड़े के साथ कोई जोर-जबरदस्ती नहीं की.

संगठन के महामंत्री मुन्ना कुमार शर्मा ने कहा, "हमने दिल्ली-एनसीआर में कुल 60 जोड़ों की शादी कराई. लेकिन हमने किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की. हमने उन्हें अपनी बात समझाई कि ऐसा करना हमारी संस्कृति के खिलाफ है और उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया. जिसके बाद वो जोड़े शादी करने को तैयार हो गए. इसमें से कई अन्य जाति और समुदाय के भी थे."
मुन्ना कुमार का कहना है, "इस तरह का दिवस मनाना केवल पाश्चात्य सभ्यता का असर है और कुछ नहीं. जहां तक हमारे ऑफिस के बाहर छात्रों के प्रदर्शन की बात है तो हम चाहते थे कि हम उनसे बात करें. लेकिन वो सिर्फ नारेबाजी कर हमारा विरोध करना चाहते थे. उनका मकसद केवल हंगामा खड़ा करना था और कुछ नहीं."
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